सामना संवाददाता / मुंबई
यदि वे ‘ऑपरेशन टायगर’ चला रहे हैं तो शिवसेना अब उसके जवाब में ‘ऑपरेशन तोड़ो’ शुरू करेगी। ‘तोड़ो’ का आदेश वंदनीय शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने हमें दिया है। शिवसैनिको को अच्छी तरह पता है कि पार्टी से विश्वासघात करने वालों और उनका समर्थन करने वालों को वैâसे तोड़ना है। मेरे पास सिर्फ आधा घंटा पावर दें। ऐसा जोरदार हमला करते हुए शिवसेना नेता और सांसद संजय राऊत ने कथित तोड़-फोड़ की राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए महायुति और भाजपा को सीधे चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि शिवसेना से गद्दारी करने वाले नेताओं तथा पार्टी को खत्म करने की बात करने वालों को उनकी जगह दिखाने का समय आ गया है। संजय राऊत ने कहा कि हम कानूनी लड़ाई तो लड़ ही रहे हैं, लेकिन अब जनता के बीच जाकर संगठन को और मजबूत बनाने का अभियान भी चलाया जाएगा। जिन लोगों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें राजनीतिक रूप से ‘तोड़ो’ (पराजित करना) ही हमारा लक्ष्य होगा। इसी अभियान को हमने ‘ऑपरेशन तोड़ो’ नाम दिया है। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से शिवसेना समाप्त नहीं हो जाती। पार्टी की वास्तविक ताकत मैदान में दिखाई देगी और इस अभियान के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों को चुनौती दी जाएगी।
छह सांसदों को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा
इस बीच कुछ क्षेत्रों में गद्दार सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन और नाराजगी की घटनाएं सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में संबंधित छह सांसदों को राज्य सरकार की ओर से ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों की समीक्षा के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में राज्य गुप्तवार्ता विभाग के आयुक्त शिरीष जैन ने आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
गद्दार सांसदों के खिलाफ जनता के बीच भारी आक्रोश
शिवसेना के ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर जीतकर लोकसभा पहुंचे छह सांसदों द्वारा पार्टी व्हिप की अवहेलना करने, गद्दारी करने और एकनाथ शिंदे गुट का साथ देने के निर्णय से महाराष्ट्र की जनता के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इन सांसदों के खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
उधर दिल्ली में शिवसेना के व्हिप की अवहेलना कर पार्टी की बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सांसदों संजय जाधव, नागेश पाटील-आष्टीकर, भाऊसाहेब वाघचौरे, संजय दीना पाटील और ओमराजे निंबालकर सहित छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। बताया जाता है कि केंद्र और राज्य की सत्ता के बल पर भाजपा तथा शिंदे गुट द्वारा राजनीतिक दलों में तोड़-फोड़ की कोशिशें की जा रही हैं। शिवसेना का आरोप है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के माध्यम से पार्टी में फूट डालने का प्रयास किया गया। इसी पृष्ठभूमि में शिवसेना ने दिल्ली स्थित अपने संसदीय कार्यालय में सांसदों की आपात बैठक बुलाई थी। बैठक के संबंध में पार्टी के सभी सांसदों को व्हिप जारी किया गया था।
बुधवार सुबह ११ बजे आयोजित इस बैठक में शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत, लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत, मुख्य सचेतक अनिल देसाई और सांसद राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे। इस बैठक में शिवसेना के नौ सांसदों में से छह सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। शिवसेना नेताओं का कहना है कि जो सांसद कुछ दिन पहले तक शिवसेना के साथ बने रहने का दावा कर रहे थे, उन्होंने बैठक से दूरी बनाकर अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है। इन घटनाक्रमों के बाद महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में नाराजगी बढ़ गई है और संबंधित सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है।
