सामना संवाददाता / नई दिल्ली
नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं, बल्कि उन विषय विशेषज्ञों ने लीक किया था, जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह पूरी साजिश कई महीने पहले ही रच ली गई थी। एनटीए के विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त शिक्षकों ने प्रश्नों को याद कर लिया और होटल लौटने के बाद उन्हें कागज पर लिख लिया। बाद में इन्हें कोचिंग सेंटरों और दलालों के जरिए बेचा गया। सीबीआई द्वारा विशेष अदालत में दाखिल आरोप पत्र (चार्जशीट) में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। सीबीआई ने महाराष्ट्र के तीन विषय विशेषज्ञों को इस साजिश का मुख्य आरोपी बताया है और कुल १३ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार, एनटीए के पैनल में शामिल रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी, भौतिक शास्त्र (फिजिक्स) की प्रोफेसर मनीषा मांढरे और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की शिक्षिका मनीषा हवालदार ही पेपर लीक के मुख्य स्रोत थे। उन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ उसका मराठी अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने बेहद सुनियोजित तरीके से सभी प्रश्न याद किए और बाद में उन्हें लिखकर पेपर लीक कर दिया।
कोरे कागजों पर किया जाता था अनुवाद का कार्य
आरोप पत्र के मुताबिक, इन विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए एनटीए की इमारत में एक सुरक्षित स्थान पर कोरे कागज दिए जाते थे, जिन पर अनुवाद का कार्य किया जाता था। प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी ने इन्हीं कागजों पर केमिस्ट्री के सभी १३५ प्रश्न संक्षेप में लिख लिए।
प्रो. कुलकर्णी, प्रो. मनीषा मांढरे और शिक्षिका मनीषा हवालदार मुख्य साजिशकर्ता
भौतिक शास्त्र (फिजिक्स) की प्रोफेसर मनीषा मांढरे का तरीका कुछ अलग था। आरोप पत्र के अनुसार, एनटीए में काम खत्म करने के बाद वह होटल लौटती थीं और एनसीईआरटी की पुस्तकों में वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) और प्राणी विज्ञान (जूलॉजी) से जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेदों को रेखांकित (अंडरलाइन) कर लेती थीं। लंबे अनुभव के कारण वह इन अनुच्छेदों के आधार पर प्रश्नों को दोबारा तैयार कर लेती थीं। वहीं, मनीषा हवालदार होटल लौटने के बाद फिजिक्स के प्रश्न लिख लिया करती थीं। इसी आधार पर सीबीआई ने आरोप पत्र में तीनों को पेपर लीक का मुख्य साजिशकर्ता और प्रमुख स्रोत बताया है।
सीबीआई के आरोप पत्र में एनटीए की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप पत्र के अनुसार, इन विशेषज्ञों की न तो प्रवेश और निकास के समय तलाशी ली जाती थी और न ही उनके कार्यस्थल पर सीसीटीवी निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इसी सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर आरोपियों ने प्रश्नपत्र लीक किया।
पेपर लीक का नेटवर्क
जांच के अनुसार, तेजस शाह, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज मोटेगांवकर और धनंजय लोखंडे के जरिए प्रश्नपत्र अलग-अलग कोचिंग सेंटरों तक पहुंचाया गया, जहां छात्रों को उसका अभ्यास कराया गया। वहीं शुभम खैरनार, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल ने राजस्थान में, जबकि यश यादव ने हरियाणा में प्रश्नपत्र बेचने का काम किया। आरोप पत्र में कहा गया है कि तेजस शाह और मनीषा हवालदार के मोबाइल फोन से मिले प्रश्नपत्र की लिखावट आरोपियों की लिखावट से मेल खाती है।
डिजिटल सबूत जुटाने का काम जारी
सीबीआई मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि फाइल साझा करने के लिए टेलीग्राम, व्हॉट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा मांगीलाल बिवाल के मोबाइल फोन से कुछ ऑडियो फाइलें भी बरामद हुई हैं। इनमें २६ अप्रैल की एक ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर पेपर लीक का भंडाफोड़ होने की आशंका जताई गई थी।
