सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राज्यसभा में गैरमौजूदगी को राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने गंभीरता से लिया है। राधाकृष्णन ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश देते हुए कहा, ‘शाह को सदन में आने के लिए कहें। विपक्ष की भावनाएं उन तक पहुंचाएं।’
विपक्ष की मांग है कि सरकार जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस अत्याचार और राम मंदिर में कथित चोरी के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा कराए तथा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस पर बयान दें। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि चर्चा और जवाब देना तो दूर, अमित शाह सदन में भी नहीं आ रहे हैं। इसे लेकर विपक्ष ने आक्रामक रुख अपना लिया है।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दोनों सदनों में इंडिया गठबंधन के सांसद अमित शाह सदन में आओ’ के नारे लगा रहे हैं। पिछले दो सप्ताह से यही स्थिति बनी हुई है और लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ रही है।
अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर संसद में हंगामा जारी
संसद में अमित शाह की अनुपस्थिति के मुद्दे पर विपक्ष ने शुक्रवार को भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। शोर-शराबे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले लोकसभा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से संबंधित एक विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
बैठकों का दौर जारी
संसद में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है। किरेन रिजिजू ने बुधवार और गुरुवार को राहुल गांधी से मुलाकात की थी। शुक्रवार को अमित शाह ने रिजिजू से मुलाकात की, जिसके बाद शाह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मिले। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई।
माना जा रहा है कि सरकार चालू सत्र में ही परिसीमन और एफसीआरए से संबंधित विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसके लिए संसद का सुचारु रूप से चलना जरूरी है। इसी मुद्दे पर शाह और ओम बिरला के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
