-कांग्रेस बोली, जल्दबाजी में मतदाता अधिकार से खिलवाड़ मंजूर नहीं
सामना संवाददाता / मुंबई
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की समयसीमा १० दिन बढ़ाकर १७ अगस्त २०२६ कर दी है, लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल इससे संतुष्ट नहीं हैं। कांग्रेस ने प्रक्रिया के लिए और समय देने की मांग की है। अंतिम मतदाता सूची अब २७ अक्टूबर को प्रकाशित होने की प्रस्तावित तारीख है। सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस इतनी लंबी मोहलत क्यों मांग रही है? इसका जवाब आंकड़ों में छिपा है।
महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े मतदाता आधार वाले राज्यों में है। २०२४ के लोकसभा चुनाव में राज्य में ९ करोड़ से अधिक मतदाता थे। कांग्रेस का कहना है कि पिछले करीब २५ वर्षों में महाराष्ट्र के मतदाताओं की संख्या में लगभग ३.५ करोड़ की वृद्धि हुई है। ऐसे में करोड़ों मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन कुछ महीनों में पूरा करने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हर्षवर्धन सपकाल ने चुनाव आयोग के सामने एक महत्वपूर्ण उदाहरण रखा है। कांग्रेस के मुताबिक महाराष्ट्र में पिछली व्यापक एसआईआर प्रक्रिया २००२-०३ में करीब १३ महीने चली थी। अब लगभग २५ साल बाद मतदाताओं की संख्या में करीब ३.५ करोड़ का इजाफा हो चुका है। फिर इतनी बड़ी आबादी की मतदाता सूची को कुछ महीनों में निपटाने की जल्दबाजी क्यों?
सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग से १८ महीने से दो वर्ष तक का समय मांग चुकी है। पार्टी का तर्क है कि राज्य में तत्काल कोई विधानसभा चुनाव निर्धारित नहीं है, इसलिए प्रक्रिया को जल्दबाजी के बजाय पूरी पारदर्शिता और सावधानी से किया जाना चाहिए। कांग्रेस की चिंता सिर्फ समय तक सीमित नहीं है। पार्टी ने एसआईआर के आंकड़ों को सुरक्षित रखने, राजनीतिक दलों को प्रमाणित डेटा उपलब्ध कराने और मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने के लिए पर्याप्त अवसर देने की मांग भी की है।
