अनिल मिश्र / गयाजी
पिछले छह सितंबर से धार्मिक नगरी गयाजी में में चल रहे पितृपक्ष मेला में आज नवमी तिथि के अवसर पर मातृ नवमी के उपलक्ष्य में सीता कुंड में पिण्ड दानियों ने श्राद्धकर्म संपन्न किया। इस स्थान पर त्रेता युग में जन्म लेने वाले भगवान श्री राम की पत्नी और माता सीता जी ने अपने श्वसुर दशरथ जी के निमित बालू के पिंड बना कर दान किया था।ऐसा बताया जाता है कि श्री राम पिण्ड दान के कुछ सामाग्री लाने चले गए थे। इसी बीच मृत आत्मा राजा दशरथ ने वहां पर बैठी सीता जी को कहा कि जल्दी में पिण्ड दान को कहा। इसी कारण पिण्ड के कोई सामग्री नहीं होने के कारण माता सीता ने अनतःसलिला फल्गु नदी के रेत से ही पिण्ड दान किया। इसी कारण इसका नाम सीता कुण्ड पड़ा।इस संबंध में गयाजी में पितृपक्ष के मौके पर कोलकाता से आये पंडित सुकेश उपाध्याय ने बताया कि आज के दिन मातृ नवमी के उपलक्ष्य में सीता माता को सुहाग की वस्तुएं भेट की जाती है। इसके साथ ही गयाजी में सीता कुंड को राम गया के नाम से भी जाना जाता है।
