उमेश गुप्ता / वाराणसी
पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में किसानों ने काशी द्वार को लेकर अधिग्रहित किए जाने वाले जमीन के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। सिर पर कफन बांधकर दर्जनों किसान सड़कों पर उतरे और सरकार को खुली चुनौती दी। किसानों ने कहा कि उनकी उपजाऊ भूमि हर हाल में बचाई जानी चाहिए।
किसानों द्वारा बताया गया कि विकास योजनाओं की आड़ में जमीन छीनी जा रही है। गांव-गांव में अधिग्रहण की प्रक्रिया से किसान काफी परेशान हैं और भय के साए में जी रहे हैं। ढाई साल से जारी आंदोलन अब और तेज होता दिख रहा है। इस प्रदर्शन में प्रभावित होने वाले गांव की महिलाएं भी शामिल हुईं। उन्होंने भी कफन धारण कर सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। उनका कहना था कि खेत केवल रोज़गार नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की गारंटी भी हैं। ऐसे में सरकार इसे जबरन नहीं अधिग्रहित कर सकती।
ग्रामीणों द्वारा आरोप लगाया गया कि सरकार केवल योजनाओं का नाम लेकर खेती योग्य ज़मीन छीन रही है। लेकिन किसानों को न तो कोई वैकल्पिक सुविधा मिल रही है और न ही रोजगार का भरोसा। उनके अनुसार यह सीधा अस्तित्व का संकट है।
नेताओं ने किसानों को दिया सहारा
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष रामजी सिंह ने कहा कि किसान मिट सकते हैं, लेकिन अपनी जमीन कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने इसे किसानों की जीवनरेखा बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
