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मुस्लिम वर्ल्ड : इजरायली बॉर्डर पर चीन की मिसाइलें, मिस्र ने किया खेल!

सूफी खान

कतर पर हमले के बाद से अरब से लेकर अप्रâीकी मुस्लिम मुल्क तक हर जगह हड़कंप मचा हुआ है। इन देशों का अमेरिका से विश्वास डगमगा गया है और अपनी सुरक्षा के लिए ये देश नए विकल्पों पर आ गए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच मिस्र ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। चीन से खरीदी गई अत्याधुनिक एचक्यू-९ जीबी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को अब मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में तैनात कर दिया गया है। यह सिस्टम न केवल मिस्र की सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि गाजा, दक्षिण इजरायल और रेड सी इलाके पर भी निगरानी रखने में सक्षम होगा।
जी हां, सिनाई प्रायद्वीप में मिस्र की नई सैन्य तैनाती ने क्षेत्रीय समीकरणों को बदल दिया है। एचक्यू-९ चीन में बनी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करनेवाली मिसाइल प्रणाली है, जिसकी मारक क्षमता लगभग ३०० किलोमीटर तक है। ये प्रणाली लड़ाकू विमानों, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है।
वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि इस सिस्टम की तैनाती से मिस्र की वायु रक्षा क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। खासकर, गाजा में चल रही सैन्य गतिविधियों, हमास और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और रेड सी क्षेत्र में हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों को देखते हुए यह तैनाती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि ये मिसाइल मिस्र को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत सुरक्षा ढांचा प्रदान करेगी। इससे मिस्र की निगरानी क्षमता भी बढ़ेगी और यह एक स्पष्ट संकेत है कि वह अब बाहरी खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह कदम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिस्र और चीन के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का भी एक बड़ा उदाहरण है। बीते कुछ सालों में मिस्र ने चीन से कई तरह के रक्षा उपकरण खरीदे हैं– ड्रोन, रडार और अब यह वायु रक्षा प्रणाली। कतर पर हमले के बाद से ही इजरायल के पड़ोसी देशों को समझ में आ गया है कि इजरायल किसी का नहीं है। वो जब चाहे, जिसे चाहे निशाना बना सकता है और अमेरिका उसके साथ खुलकर खड़ा भी हो जाता है।
मिस्र के इस कदम पर अब तक इजराइल या अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि इस तैनाती को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
सिनाई प्रायद्वीप पहले से ही सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। मिस्र ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट किया है कि यह तैनाती पूरी तरह रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य किसी देश को निशाना बनाना नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में यह एक बड़ा संदेश जरूर है।
तो मिस्र की इस सैन्य तैनाती ने मध्य पूर्व की सुरक्षा नीति को एक नया मोड़ दे दिया है। अब देखना होगा कि क्षेत्र के अन्य देश इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, एचक्यू-९बी प्रणाली के जरिए मिस्र ने अपना सुरक्षा कवच और मजबूत कर लिया है। इसी तरह सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान से डिफेंस डील की है। इसे भी ग्रेटर इजरायल को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हो सकता है कि आगे आनेवाले दिनों में अरब मुल्कों का झुकाव रूस और चीन के खेमें की तरफ देखने को मिले।

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