मुख्यपृष्ठअपराधरूबी के अल्हड़पन ने तबाह कर डालीं दो जिंदगियां

रूबी के अल्हड़पन ने तबाह कर डालीं दो जिंदगियां

२० साल की रूबी लखनऊ के आशियाना इलाके में नौकरी करती थी। दिल खोल कर बात करने की उसकी अदा से सब को लगता था कि रूबी उसे ही दिल दे बैठी है। वह बहुत सारे लोगों से मिलती-जुलती थी, जिनमें से एक आनंद भी था। रूबी और आनंद की आपस में गहरी दोस्ती हो गई। दोस्ती से शुरू हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे रंग लाने लगी। वक्त के साथ दोनों के संबंध गहराने लगे। आनंद चाहता था कि रूबी केवल उसके साथ ही रहे पर रूबी हर किसी से बातें करती थी। आनंद और रूबी का चक्कर चल ही रहा था कि वह इंद्रपाल के संपर्क में आ गई। इंद्रपाल उस के साथ काम करता था। अब रूबी कभी-कभी आनंद के बजाय इंद्रपाल के साथ आने-जाने लगी। आनंद को रूबी और इंद्रपाल का आपस में घुलना-मिलना पसंद नहीं आ रहा था। वह सोच रहा था कि किसी दिन रूबी को समझाएगा। एक दिन रूबी और इंद्रपाल पर चाट के ठेले पर खड़े पानीपूरी खा रहे थे। आनंद ने दोनों को देख लिया तो उसे गुस्सा आ गया। जब रूबी आनंद से मिली तो उसने कहा, ‘तुम आजकल अपने नए दोस्त से कुछ ज्यादा ही घुल-मिल रही हो। यह मुझे पसंद नहीं है।
‘तुम भी क्या-क्या सोचते रहते हो, हम दोनों केवल साथी हैं। कभी-कभी उसके साथ घूमने चली जाती हूं, इससे तुम्हारे और मेरे संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तुम परेशान मत हो।’
रूबी ने आनंद से बहस नहीं की और चली चुपचाप चली गई, लेकिन आनंद का यह तरीका उसे पसंद नहीं आया। उसने सोच लिया कि आनंद से पीछा छुड़ाना जरूरी है। आनंद रूबी से नाराज था और उसने इस बात की शिकायत रूबी के चाचा से कर दी। चाचा नाराज हो गए और उसने रूबी को नौकरी न करने की हिदायत दी।
अगले दिन रूबी ने यह बात इंद्रपाल को बताई। इंद्रपाल ने कहा कि रूबी हम यह दोस्ती नहीं तोड़ सकते। मुझे कोई डर नहीं है, जब तक तुम नहीं चाहोगी, हमें कोई अलग नहीं कर सकता। रूबी ने इंद्रपाल से दूरी बनानी शुरू कर दी। यह बात इंद्रपाल को हजम नहीं हो रही थी। एक दिन उसने रूबी से न मिलने का सबब पूछा तो रूबी ने ठीक से कोई जवाब नहीं दिया। रूबी पर निगाह रख रहे आनंद को लगा कि इंद्रपाल उसकी राह का कांटा बन गया है।
यह बात उसने रूबी को भी नहीं बताई। आखिर आनंद के मन में इंद्रपाल को रास्ते से हटाने की एक खतरनाक योजना बन गई। इस योजना के लिए उसे रूबी की मदद की जरूरत थी, ताकि वह इंद्रपाल को एकांत में बुला सके। रूबी इंद्रपाल को बुलाने के लिए तैयार हो गई। १५ जून, २०१८ की बात है। रूबी ने फोन कर के इंद्रपाल को किला चौराहे पर मिलने के लिए बुलाया।
इंद्रपाल के लिए रूबी का बुलाना बहुत बड़ी खुशी की बात थी। वह बिना कुछ सोचे-समझे किला चौराहे पर पहुंच गया। रूबी बातचीत करने के बहाने उसे बिजली पासी किला के जंगल में ले गई, वहां पहले से ही आनंद, आलोक, अविनाश, गौरव, विकास और सुधीर घात लगाए बैठे थे।
इंद्रपाल को अकेला देखकर सब के सब उस पर टूट पड़े। जब मारपीट में इंद्रपाल बेहोश हो गया तो उसे गला दबाकर मार डाला। बाद में शव की पहचान छिपाने के लिए पैट्रोल डाल कर उसे जला भी दिया गया। अगले दिन उसकी लाश थाना आशियाना पुलिस को मिली। पुलिस ने आईपीसी की धारा ३०२ के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू की। लाश की शिनाख्त होने के बाद इंद्रपाल के घर सीतापुर जानकारी दी गई। उसके पिता राजाराम यादव लखनऊ आए और अपने बेटे का दाहसंस्कार करने के बाद वह पुलिस के साथ अपराधियों की खोज में लग गए।
पुलिस ने इंद्रपाल के मोबाइल फोन की छानबीन की तो फोन में रूबी का नंबर मिला। नंबर की डिटेल्स से पता चला कि दोनों के बीच बहुत ज्यादा बातचीत होती थी। घटना के दिन भी रूबी के फोन से इंद्रपाल के फोन पर बात की गई थी। इससे पुलिस को मामले का सुराग मिलता दिखा। पुलिस को अपनी छानबीन में यह भी पता चला कि रूबी के चाचा ने उसे इंद्रपाल से मिलने के लिए मना किया था और नौकरी छुड़वा दी थी। जब पुलिस ने पूरी छानबीन कर ली तो रूबी से घटना के बारे में पूछा गया। रूबी ने शुरुआत में तो बहानेबाजी की पर पुलिस ने जब उसे सबूत दिखाए तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। रूबी का अल्हड़पन दोनों पर भारी पड़ा। एक की जान गई और दूसरा जेल में है।

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