भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
अक्सर लोग सोचते हैं कि किसी भी कंपनी का शेयर म्यूच्युअल फंड में आसानी से शामिल हो जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि किसी कंपनी को फंड पोर्टफोलियो में जगह बनाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं। यह कोई भावनाओं या नाम के आधार पर लिया गया निर्णय नहीं होता, बल्कि लंबी और कठोर रिसर्च प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही कंपनियां म्यूच्युअल फंड की टोकरी तक पहुंच पाती हैं।
सबसे पहले कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को परखा जाता है। इसमें मुनाफे का रिकॉर्ड, कर्ज का स्तर, नकदी प्रवाह और बैलेंस शीट की ताकत को देखा जाता है। केवल यही नहीं, कंपनी के बिजनेस मॉडल की स्थिरता और आनेवाले समय में उसकी विकास क्षमता भी एक बड़ा पैमाना होती है। फिर आती है प्रबंधन की गुणवत्ता – क्या कंपनी की लीडरशिप ईमानदार और पारदर्शी है? क्या उनके निर्णय शेयरधारकों के हितों के अनुकूल हैं?
इसके बाद कंपनियां कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कानूनी अनुपालन की कसौटी पर परखी जाती हैं। यदि किसी कंपनी का टैक्स, ऑडिट या रेगुलेटरी रिकॉर्ड साफ नहीं है तो चाहे उसके मुनाफे कितने भी बड़े हों, वह म्यूच्युअल फंड में जगह नहीं बना सकती। इसी तरह बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति, ब्रांड वैल्यू और जोखिम प्रबंधन की क्षमता भी जांची जाती है।
यही कारण है कि किसी भी म्यूच्युअल फंड पोर्टफोलियो में क्वॉलिटी स्टॉक ही चुने जाते हैं। क्वॉलिटी स्टॉक्स हमेशा अपनी बुक वैल्यू से अधिक प्रीमियम पर ट्रेड होते हैं, यानी देखने में महंगे लगते हैं। लेकिन लंबी अवधि में यही स्टॉक्स भरोसेमंद साबित होते हैं, क्योंकि वे देर से ही सही लेकिन स्थिर और बेहतर रिटर्न देते हैं। धोखा देने की संभावना लगभग न के बराबर होती है और अगर कहीं थोड़ी-बहुत गड़बड़ी दिखाई दे, तो फंड मैनेजर तुरंत एक्शन लेकर ऐसे स्टॉक्स को पोर्टफोलियो से बाहर कर देते हैं। सत्यम और यस बैंक जैसे कई उदाहरण हैं जहां फंड मैनेजरों ने इन कंपनियों को अखबारों की सुर्खियां बनने से पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
कुल मिलाकर, किसी कंपनी को म्यूच्युअल फंड में शामिल होने के लिए २५-३० अलग-अलग फिल्टरों से गुजरना पड़ता है। ये फिल्टर इतने कठोर होते हैं कि केवल वही कंपनियां इसमें टिक पाती हैं जो वास्तव में मजबूत, पारदर्शी और दीर्घकालिक विकास की क्षमता रखती हो। इसलिए जब आप म्यूच्युअल फंड में निवेश करते हैं, तो समझ लीजिए कि आपके सामने आई कंपनियां पहले ही इस कठिन चयन परीक्षा को पास कर चुकी हैं। यही कारण है कि म्यूच्युअल फंड निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और भरोसेमंद साधन माने जाते हैं।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
