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सड़क पर नहीं दिखे ट्रैफिक पुलिसकर्मी… ट्रैफिक में फंसी एंबुलेंस… तड़पता रहा मरीज!

द्रुप्ति झा / मुंबई

कई बार सिस्टम के आगे लोग इतने मजबूर हो जाते हैं कि चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। मुंबई का ट्रैफिक न केवल लोगों के लिए मुसीबत बन गया है, बल्कि ट्रैफिक के चलते लोगों की जान खतरे में पड़ने लगी है। वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है, जिसके कारण दिन-प्रतिदिन ट्रैफिक की समस्या से लोग हलाकान हो रहे हैं। ट्रैफिक के कारण न केवल जाम में गाड़ियां फंस जाती हैं, बल्कि एंबुलेंस के फंस जाने से इलाज के लिए मरीज तड़पता रह जाता है।
मुंबई से एक बार फिर ऐसी ही घटना सामने आई है, जहां दहिसर (पूर्व) वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर रावलपाड़ा ब्रिज के नीचे १० मिनट तक एंबुलेंस फंसी रही। एंबुलेंस में मौजूद मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत थी, लेकिन समय पर मरीज को इलाज न मिलने से मरीज की हालत और खराब हो गई। सड़क पर गाड़ियों के जाम में फंसे होने के कारण एंबुलेंस को जाने के लिए जगह ही नहीं मिली, जिस वजह से एंबुलेंस फंसी रही।
ट्रैफिक पुलिस का जुर्माना वसूली पर जोर
हैरानी की बात यह थी कि इस परिस्थिति में भी सड़क पर ट्रैफिक पुलिस मौजूद नहीं थी, जबकि सड़कों पर लगे जाम को कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को तैनात किया जाता है। लेकिन अक्सर ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर अपनी अनुपस्थिति दर्ज करने के बाद किसी कोने में वसूली करते रहते हैं। यह बात भी सच है कि शहर की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों की सबसे अधिक धज्जियां उड़ाई जाती हैं। जुर्माना वसूली में बाजी मारकर ट्रैफिक पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन उसकी यह सफलता कहीं न कहीं असफलता की ओर इशारा कर रही है। ट्रैफिक पुलिस को अपनी पीठ ठोकने के बजाय इस बात पर मंथन करना चाहिए कि शहर के लोगों से नियमों का पालन किस प्रकार से कराया जाए।
५५६ करोड़ रुपए से अधिक चालान वसूली
मुंबई में ई-चालान को लेकर लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच एक चौंकानेवाला खुलासा हुआ है। सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने पिछले एक साल से ज्यादा समय में कुल ५५६ करोड़ रुपए से अधिक का चालान वसूला है। १ जनवरी, २०२४ से २८ फरवरी, २०२५ के बीच मुंबई ट्रैफिक पुलिस को पोर्टल पर कुल १,८१,६१३ शिकायतें मिलीं, जिनमें से १,०७,८५० शिकायतों को अमान्य कर दिया गया। यानी हर १० में से लगभग ६ शिकायतें खारिज कर दी गर्इं।

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