सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में दल-बदल और तोड़फोड़ की राजनीति के सहारे अपनी ताकत बढ़ानेवाले शिंदे गुट में अब सत्ता की मलाई को लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद शिंदे गुट को नरेंद्र मोदी सरकार के प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में दो मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी संभावना ने शिंदे गुट के भीतर नए विवाद को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व और खासकर नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह को संतुष्ट रखने के लिए लगातार समझौते करनेवाले एकनाथ शिंदे अब अपने ही कुनबे में बढ़ती नाराजगी से जूझ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि सांसदों को मंत्री पद का भरोसा देकर साधने की कोशिश की गई, लेकिन अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर मंत्री पहले किसे बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर एनडीए में १३ तक पहुंचने के बाद दो केंद्रीय मंत्री पदों का दावा मजबूत हुआ है। मौजूदा समय में बुलढाणा के सांसद प्रतापराव जाधव केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं। अब एक नए सांसद और एक वरिष्ठ सांसद के नाम पर चर्चा होने से खेमे के भीतर बेचैनी बढ़ गई है। चर्चा यह भी है कि दो नेताओं को शिवसेना के कोटे से डेढ़-डेढ़ वर्ष के लिए मंत्री पद देने का फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है, लेकिन इसी फॉर्मूले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दोनों दावेदार पहले नंबर पर मंत्री बनने के लिए अपने-अपने समर्थकों के जरिए दबाव बना रहे हैं। इसी को लेकर शिंदे खेमे में खदबदाहट बढ़ने की बातें सामने आ रही हैं।
कुनबे की बढ़ीं महत्वाकांक्षाएं
राजनीति के जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र में कई दलों और नेताओं को साथ लाकर अपनी ताकत बढ़ानेवाले शिंदे के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने ही कुनबे की महत्वाकांक्षाओं को संभालने की है। मंत्री पद के कथित ‘लॉलीपॉप’ ने फिलहाल नेताओं को एकजुट जरूर रखा है, लेकिन ‘पहले कौन?’ का सवाल शिंदे गुट के लिए नया सिरदर्द बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित नामों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में मंत्री पद की इस कथित रस्साकशी ने शिंदे खेमे की अंदरूनी बेचैनी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
