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संपादकीय : लद्दाख के गांधी गिरफ्तार!.. डर गए तानाशाह!

सरकार ने पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता जगमान्य और ‘लोकमान्य’ सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया है। अब वांगचुक की गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए कि वे किस तरह से राष्ट्र-विरोधी हैं, कारस्तानियां शुरू हो गई हैं। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक जामवाल ने अब घोषणा की है कि लद्दाख हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ है और सोनम वांगचुक के पाकिस्तान से संबंध हैं। सरकार की ओर से बेतुका बयान दिया गया है कि वांगचुक पाकिस्तान में ‘डॉन’ अखबार के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, वांगचुक बांग्लादेश भी गए थे। अगर वांगचुक पाकिस्तान या बांग्लादेश गए भी थे तो वे किसी चोरी-छिपे रास्ते से नहीं गए थे। उन्होंने अपने भारतीय पासपोर्ट पर दोनों देशों के वीजा हासिल किए और वहां सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसी तरह नरेंद्र मोदी एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जन्मदिन पर पाकिस्तान गए थे। बांग्लादेश हमारा मित्र देश ही माना जाता है। यह आश्चर्य की बात है कि लद्दाख के पुलिस महानिदेशक को यह जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की अपदस्थ राष्ट्रपति शेख हसीना को भारत में राजनीतिक शरण दी थी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने तो सरकार के झूठ का पर्दा ही फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि वांगचुक की पाकिस्तान यात्रा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का हिस्सा थी। यह सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर था। वांगचुक ने इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर मार्गदर्शन किया। वे भारत सरकार की अनुमति से ही पाकिस्तान गए थे। जब यह स्पष्ट है तो यह कहना मूर्खता है कि ‘लेह’ में हुई हिंसा में
पाकिस्तान का हाथ
है और वांगचुक इसके लिए जिम्मेदार हैं। वांगचुक लेह-लद्दाख के लोगों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे। लद्दाख के लोगों की मांग क्या है? लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करो। यानी लोकतांत्रिक तरीकों से हमें पूर्ण राज्य का दर्जा दो। अब यह वादा किसने किया था? दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने ही लेह-लद्दाख के लोगों से यह वादा किया था। इस वादे को पूरा करने की मांग कर रहे वांगचुक को सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार करना मोदी सरकार की कायरता है। यह कोई नई बात नहीं है कि चीन ने लद्दाख में घुसपैठ की है। लेकिन लद्दाख में हिंसा पाकिस्तान ने फैलाई है, इसका मतलब मोदी प्रशासन मानता है कि पाक भी यहां घुस आया है। यह मोदी की विफलता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का फटका पाकिस्तान पर उस तरह नहीं पड़ा जैसा कि सरकार चाहती थी इसीलिए भारत में आतंकवाद और हिंसा पैâलाने का उसका काम जारी ही है। यह मोदी सरकार की विफलता है। मोदी और अमित शाह ने लद्दाख में हिंसा पैâलानेवाले पाकिस्तान के खिलाफ क्या कार्रवाई की? पाकिस्तान के साथ युद्ध रोकते समय भारत ने शर्त रखी थी कि अब से भारतीय क्षेत्र पर कोई भी हमला या कश्मीर घाटी में हिंसा भारत पर हमला माना जाएगा और उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा तो अब उस मुंहतोड़ जवाब का क्या हुआ? सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अपने सवाल उठा रहे थे। उन्होंने लद्दाख के लोगों के लिए १६ दिनों का उपवास किया। यानी उनका रास्ता गांधीवादी ही है। सरकार ने इन १६ दिनों में वांगचुक की अनदेखी की। वहां के लोगों में
ठगे जाने का अहसास
बढ़ता गया। वहां बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई। चीन लद्दाख में पहले ही घुस चुका है। वहां बड़े पैमाने पर जमीन भी उद्योगपतियों को दे दी गई है। इससे पर्यावरण का नुकसान बढ़ा है। वांगचुक इन सबके खिलाफ धैर्यपूर्वक आवाज उठाते रहे। वांगचुक ने मोदी सरकार को बताया कि चीन लद्दाख में कितना और कैसे घुस आया है। इससे मोदी और भाजपा की फजीहत हुई। इसका बदला लेने के लिए वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर हिंसा, देशद्रोही आदि का ठप्पा लगा उनके तार पाकिस्तान से जोड़ दिए। वहीं मोदी सरकार की इजाजत से भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच खेलाया जा रहा था और उससे होने वाले सैकड़ों करोड़ रुपए के वित्तीय कारोबार और सट्टे से पाकिस्तान को मदद मिल रही थी। ये सब ‘खेल’ करनेवाले भाजपा के ही सुपुत्र हैं। सरकार उन सभी को जवाबदेह नहीं ठहराती, लेकिन लद्दाख को स्वतंत्र राज्य का दर्जा देने और वहां पर एक विधानसभा की पैरवी करनेवाले, चीन की घुसपैठ के बारे में देश को चेतानेवाले, पर्यावरण और हिमालय में डटे भारतीय सैनिकों की चिंता करनेवाले वांगचुक को मोदी सरकार देशद्रोही करार देती है। सत्य हिंदुत्व का आधार है, लेकिन भाजपा का आधार झूठ और छल है। इसलिए ये लोग हिंदू हो ही नहीं हो सकते, ऐसा संताप सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने व्यक्त किया, जो शत-प्रतिशत सत्य है। लद्दाख के युवाओं के मन में आग देखकर भारत के तानाशाह डर गए, कांपने लगे और गांधीवादी वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने इससे अलग क्या किया था?

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