-रोजाना ९ लाख लीटर की गिरावट…मुंबई-पुणे-ठाणे में दूध की किल्लत होने की आशंका
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में जारी भारी बारिश का असर अब दूध आपूर्ति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के दुग्ध उत्पादन में अग्रणी अहिल्यानगर जिले में दूध संकलन और परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और पुलों के बह जाने से दूध चिलिंग प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहा है।
२८ और २९ सितंबर को राज्यभर में हुई मूसलाधार बारिश के कारण, सिर्फ दो दिन में ही रोजाना ९ लाख लीटर दूध संकलन में गिरावट आई है। यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक जैसे बड़े शहरों में दूध की किल्लत पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। रविवार (२९ सितंबर) को राज्य के प्रमुख शहरों में सिर्फ ४५ प्रतिशत दूध ही पहुंचा, जबकि बाकी दूध ग्रामीण चिलिंग सेंटरों पर अटका पड़ा रहा। चूंकि सड़कों पर पानी भरा हुआ है और कई मार्ग अवरुद्ध हैं इसलिए दूध टैंकरों को भेजना कठिन हो गया है। राज्य के संगमनेर, अकोला और अहिल्यानगर जैसे दुग्ध उत्पादन केंद्रों से महानंदा, अमूल जैसी बड़ी कंपनियों को नियमित दूध भेजा जाता है, परंतु फिलहाल यह आपूर्ति बाधित है।
संकट की जड़
अहिल्यानगर जिले में १६ लाख पशुधन है और यहां हर दिन दो बार (सुबह और शाम) दूध संकलन किया जाता है। ४२.६५ लाख लीटर प्रतिदिन दूध संकलन की क्षमता है, जो इस समय घटकर ३३.६७ लाख लीटर रह गई है। जिले में १४ तालुका सहकारी दूध संघ और ६ निजी कंपनियां दूध संकलन में जुटी हैं। यहां से औसतन २३.१४ लाख लीटर दूध थोक में बेचा जाता है।
३.६७ लाख लीटर पाउच में पैक कर स्थानीय बिक्री के लिए भेजा जाता है। १.३९ लाख लीटर दूध राज्य से बाहर भेजा जाता है। बारिश के चलते इन सभी चैनलों पर असर पड़ा है। वाड़ियां-बस्तियां, जहां से दूध संकलन शुरू होता है वहां तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
शहरी केंद्रों पर पड़ सकता है सीधा असर
यदि आनेवाले दिनों में बारिश और तेज होती है तो मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में दूध की आपूर्ति में गड़बड़ी आ सकती है। चूंकि इन शहरों की दूध की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण जिलों से आता है और यह संपूर्ण तंत्र प्राकृतिक आपदा के कारण डगमगा गया है। परिणामस्वरूप अहिल्यानगर सहित राज्य के अन्य प्रमुख दुग्ध उत्पादन क्षेत्रों में आई दूध संकलन में भारी गिरावट ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बारिश का असर सिर्फ ग्रामीण नहीं, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो राज्य को दूध संकट का सामना करना पड़ सकता है।
