प्रेम यादव / भायंदर
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के मीरा-भायंदर शहर जिला कार्याध्यक्ष गुलाम नबी फारुकी ने फेरीवालों से वसूले जा रहे शुल्क और जारी की जा रही रसीद (पावती) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फारुकी ने मीरा-भायंदर मनपा आयुक्त व प्रशासक को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि ठेकेदार फेरीवालों से ९० रुपए की रसीद काट रहे हैं, लेकिन उसके एवज में अक्सर ८९ रुपए ही रसीद पर अंकित होते हैं। इसके अलावा, कई बार रसीद पर न तो जीएसटी नंबर दर्ज होते हैं और न ही तारीख। इससे यह शंका गहराती है कि ठेकेदार वसूल की गई राशि सरकार के जीएसटी पोर्टल पर जमा कर भी रहे हैं या नहीं।
जीएसटी कानून के अनुसार, यदि किसी भी सेवा या शुल्क पर जीएसटी लिया जा रहा है, तो रसीद या बिल पर वैध जीएसटीआईएन (जीएसटी पहचान संख्या) और टैक्स ब्रेकअप स्पष्ट होना अनिवार्य है। बिना जीएसटी नंबर वाली रसीद पर लिया गया जीएसटी गैरकानूनी वसूली मानी जाती है।
जीएसटी विशेषज्ञ सीए रमेश पांडे का कहना है कि यदि रसीद पर जीएसटी नंबर और टैक्स ब्रेकअप नहीं है, तो वह रसीद कर दृष्टि से अमान्य है। ऐसी वसूली फर्जी मानी जाएगी और ठेकेदार पर टैक्स चोरी का मामला बन सकता है। फेरीवालों से लिया गया टैक्स अगर सरकार के पोर्टल पर जमा नहीं हुआ, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
इस पूरे मामले ने मीरा-भायंदर मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों ठेकेदारों की मनमानी पर मनपा चुप्पी साधे बैठी है? यदि वसूली वास्तव में गलत है तो फेरीवालों को क्यों लूटा जा रहा है और मनपा प्रशासन इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? गुलाम नबी फारुकी ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि इस सप्ताह के भीतर मनपा प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो वह कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।
