-खोपड़ी खोले बिना नाक के रास्ते हुई सर्जरी
-हिंदुस्थान में हर साल १० लाख होते हैं प्रभावित
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे के निजी अस्पताल में हाल ही में नाक से पांच मरीजों को नई जिंदगी मिली है, यानी सफल ब्रेन ट्यूमर सर्जरी की गई। इस ऑपरेशन में एंडोस्कोपिक एंडोनैसल पिट्यूटरी ट्यूमर एक्सिशन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ट्यूमर बिना खोपड़ी खोले ही नाक के रास्ते हटाया गया और मरीजों की दृष्टि फिर से बहाल हुई। चिकित्सकों के मुताबिक, हिंदुस्थान में हर साल लगभग १० लाख लोग पिट्यूटरी एडेनोमा से प्रभावित होते हैं, जिससे सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी से इस ट्यूमर का असर कम किया जा सकता है और मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ जीवन की ओर लौटाया जा सकता है।
ठाणे स्थित हाईलैंड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के जरिए पांच मरीजों के ब्रेन ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला है। इस सर्जरी को नाक के रास्ते अंजाम दिया गया, जिसके बाद सभी मरीजों की दृष्टि लौट आई और वे स्वस्थ हैं। इस सर्जरी को एंडोस्कोपिक एंडोनैसल पिट्यूटरी ग्लैंड ट्यूमर एक्सिशन सर्जरी कहा जाता है। अस्पताल के प्रमुख न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रनाथ तिवारी के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी से बेहतर है, क्योंकि इसमें खोपड़ी को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे मरीज जल्दी ठीक होते हैं और जटिलताओं का जोखिम कम रहता है। उन्होंने कहा कि इस सर्जरी के लिए नेत्र सर्जन, ईएनटी सर्जन और न्यूरोसर्जन के बीच तालमेल की जरूरत होती है।
मरीजों ने साझा किया अनुभव
ठाणे निवासी ५४ वर्षीय रोशनी लोखंडे को जनवरी २०२५ में कान में दर्द और बाएं हाथ में सुन्नपन की शिकायत के बाद एमआरआई में १२ मिमी के ट्यूमर का पता चला। १२ मार्च, २०२५ को सर्जरी के बाद वह पूरी तरह ठीक हैं। भिवंडी निवासी ६४ वर्षीय पुखराज शर्मा को मई २०२४ में सिर में भारीपन की शिकायत थी। इसके बाद जब उनका एमआरआई किया गया तो उसमें २.५ मिमी के ट्यूमर का पता चला। १० सितंबर, २०२४ को उनकी सर्जरी हुई और अब वे स्वस्थ हैं। मुंब्रा निवासी ४२ वर्षीय सायरा खान को जून २०२५ में अचानक धुंधली दृष्टि की समस्या हुई। आंखों के डॉक्टर के इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला। उनके एमआरआई में ब्रेन ट्यूमर का पता चला और १ सितंबर, २०२५ को उनकी सर्जरी हुई और अब उनकी दृष्टि ठीक है। ठाणे की २७ वर्षीय आल्विया जैनब का सबसे जटिल मामला था। २० साल की उम्र में उनकी बाईं आंख की रोशनी चली गई और २०१८ में पहली सर्जरी हुई। दुर्लभ मामला होने के कारण ट्यूमर दोबारा बढ़ा और २०२१ और २०२३ में दो बार और सर्जरी करनी पड़ी। इसके बाद रेडिएशन थेरेपी भी कराई गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और एक आईटी फर्म में काम करती हैं। ठाणे की ही ३५ वर्षीय वैशाली पाटील की आंखों से पानी आने, कमजोरी, गर्दन में दर्द और चक्कर आने की शिकायत थी। एमआरआई में १० मिमी के ब्रेन ट्यूमर का पता चला। ६ अगस्त, २०२५ को सर्जरी के बाद अब वो ठीक हैं।
सामान्य है यह ब्रेन ट्यूमर
डॉ. तिवारी ने बताया कि पिट्यूटरी एडेनोमा देश में एक सामान्य ब्रेन ट्यूमर है, जो हर साल लगभग दस लाख लोगों को प्रभावित करता है। यह ट्यूमर सिरदर्द और दृष्टि संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। अधिकांश पिट्यूटरी एडेनोमा वैंâसर रहित होते हैं और ये आनुवंशिक कारणों से नहीं होते।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. तिवारी ने जोर देकर कहा कि लगातार सिरदर्द, देखने में धुंधलापन, दोहरी दृष्टि या हार्मोनल असंतुलन जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से सलाह लेनी चाहिए। समय रहते पता चलने और आधुनिक तकनीकों से इस तरह के ट्यूमर का सफल इलाज संभव है।
