सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में मानसून की पहली ही बारिश में उस समय चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब महापौर रितु तावड़े जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही थीं और उनकी आंखों के सामने ही एक मनपा अधिकारी खुले मैनहोल में गिर गया। इस घटना ने नाला सफाई, मैनहोल सुरक्षा और मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर किए जा रहे दावों की पोल खोल दी। इस मामले को लेकर शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने सत्तारूढ़ भाजपा-शिंदे गठबंधन और मनपा प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
नाला सफाई का किया गया सिर्फ दिखावा
आदित्य ठाकरे ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रशासन और ठेकेदारों के भ्रष्ट कामकाज के कारण मुंबई की यह स्थिति हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार महीनों से केवल यह दिखाया जा रहा था कि कौन-सा नाला साफ किया गया और कौन-सा काम पूरा हुआ। जिन ठेकेदारों को पहले काली सूची में डाला गया था, उन्हें ही फिर से ठेके दिए गए। इसी लापरवाही और गड़बड़ी का परिणाम है कि महापौर के सामने ही एक व्यक्ति मैनहोल में गिर गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और महापौर को कभी भी मुंबई की चिंता नहीं रही। उन्हें केवल ठेकेदारों और बिल्डरों की चिंता है। जिन लोगों की इतनी चिंता की जा रही है, कम से कम यह तो देखा जाना चाहिए था कि उन्होंने काम सही ढंग से किया या नहीं।
न पानी संभाल पाए, न बारिश
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मनपा ने आधिकारिक रूप से केवल १० प्रतिशत जलकटौती की घोषणा की थी, लेकिन वास्तविकता में मुंबईवासियों को ४० से ५० प्रतिशत तक पानी की कमी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले मुंबईकरों को पानी के लिए परेशान किया गया और अब बारिश आते ही महापौर के सामने ही एक व्यक्ति मैनहोल में गिर गया। इसका मतलब है कि न तो आप पानी की समस्या संभाल पाए और न ही बारिश की स्थिति। सत्ताधारियों ने मुंबई को डुबोकर रख दिया है।
