-भाजपा नगरसेवक ने खोली अपनी ही सत्ता की पोल
-पहली ही बारिश में बह गए मनपा के दावे
-१०० प्रतिशत नाला सफाई का दावा निकला खोखला, मीरा-भायंदर के कई इलाके जलमग्न
सुरेश गोलानी / मुंबई
मंगलवार रात को मानसून की पहली ही बारिश ने मीरा-भायंदर महानगरपालिका द्वारा किए गए १०० प्रतिशत नाला सफाई के दावों की पोल खोलकर रख दी है। सफाई व्यवस्था में ठेकेदार और मनपा प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण शहर के कई इलाकों में नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा। ‘दोपहर का सामना’ द्वारा नालों में कचरे के अंबार के बारे में प्रशासन को पहले से आगाह करने के बावजूद प्रशासन और ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती गई, जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। भायंदर-पश्चिम के बेकरी गल्ली, गणेश देवल नगर सहित मीरा रोड और काशीमीरा में स्थित कई निचले इलाकों में पानी निकासी के लिए नाले और नालियां साफ ना किए जाने से बारिश का पानी रात को सड़कों पर भर गया। घरों और दुकानों में जलभराव से भारी नुकसान के अलावा अधूरे और बंद पड़े निर्माणकार्य की वजह से सड़कें कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गर्इं। मनपा प्रशासन के दावों के अनुसार शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई १०० प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई बड़े नाले आज भी कूड़े-कचरे, गाद (सिल्ट), मलबे और जल निकासी में बाधा डालने वाले अवरोधों से भरे पड़े हैं। खुद सत्ताधारी भाजपा के नगरसेवक दरोगा पांडे ने नाले सफाई में लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ठेकेदार का भुगतान रोकने और ब्लैकलिस्ट करने की मांग करते हुए कहा कि, ‘कच्चे नालों की साफ-सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया, जिससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं। जनता त्रस्त है, लेकिन ठेकेदार और अधिकारी अपने मस्ती में मस्त हैं।’
ज्ञात हो कि मीरा-भायंदर मनपा प्रशासन ने निजी कंपनियों को नाला सफाई और भारी बरसात के दौरान निचले और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए सक्शन पंप लगाने और उनके संचालन का ठेका दिया है। ४ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के इन ठेकों की निविदा नियमानुसार ठेकेदारों को मनुष्यबल के अलावा जेसीबी, बोट-पोक्लेन और हाइड्रोलिक अर्थ मूविंग मशीनों का उपयोग करके नालों की शत-प्रतिशत सफाई करना अनिवार्य है, लेकिन लापरवाही और कमीशनखोरी के चलते कहीं सफाई का कार्य अधूरा है तो कहीं निकाली गई गाद को नालों के किनारे ही जमा कर दिया गया है। ज्ञात हो कि शहर में १५० से ज्यादा बड़े और छोटे नाले हैं।
