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मुंबई मनपा के अस्पताल वेंटिलेटर पर! …‘महायुति’ की लापरवाही से स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल

विपक्ष ने शासन और प्रशासन का किया घेराव
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में महायुति सरकार और मनपा की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवा को बेहाल कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के लिए बजट में आवंटित ७ हजार करोड़ के खेल में मरीजों की जान दांव पर लगी हुई है। वेंटिलेटर पर पड़े मनपा अस्पताल इसके सबसे भयावह उदाहरण हैं। मरीजों की बुनियादी सुविधाओं, आवश्यक दवाओं और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। इस मामले में विपक्ष ने कल शासन-प्रशासन का घेराव किया है।
कांग्रेस की मुंबई अध्यक्ष व सांसद वर्षा गायकवाड ने कल विलेपार्ले के आर. एन. कूपर अस्पताल का दौरा किया और वहां की भयावह स्थिति को उजागर किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में न तो मरीजों के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं हैं और न पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य कर्मचारी भी बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि गंदगी और स्वच्छता की कमी के कारण चूहों का आतंक पैâला हुआ है। पिछले दो महीनों में छह मरीज चूहों के काटने का शिकार बने हैं। यह स्थिति दिखाती है कि महायुति सरकार और मनपा ने स्वास्थ्य सेवा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दी है।
निजीकरण की तैयारी
सांसद वर्षा गायकवाड ने कहा कि यह समस्या केवल कूपर अस्पताल तक सीमित नहीं है। कुर्ला, बांद्रा, गोवंडी और घाटकोपर के उपनगरीय अस्पतालों में भी इसी प्रकार की स्थिति देखी गई है। यह सब सरकारी अस्पतालों के निजीकरण की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें जनता की जान को जोखिम में डाल दिया गया है। गायकवाड ने चेतावनी दी कि सरकार और मनपा की उदासीनता ने मरीजों की जानों के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया है। अगर थोड़ी भी नैतिकता और जिम्मेदारी बची है, तो उन्हें तुरंत सभी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं, पर्याप्त दवाएं और स्टाफ सुनिश्चित करना चाहिए।

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