– महायुति सरकार खरीदने जा रही है १,७०० नई रुग्ण वाहिकाएं
-तकरीबन एक हजार एंबुलेंस पहले से पड़ी हैं बेकार
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में करीब एक हजार से अधिक एंबुलेंस बेकार पड़े हुए हैं। इनमें से कई एंबुलेंस के लिए चालक तक उपलब्ध नहीं हैं, जिस कारण उनका उचित तरीके से संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति पैदा होने के बावजूद महायुति सरकार १,७०० नई रुग्ण वाहिकाएं खरीदने जा रही है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या ये सचमुच जनता की सुविधा के लिए या चुनावी ‘सौगात’ मात्र ही हैं।
बता दें कि कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के तहत १०८ एंबुलेंस के साथ-साथ १०२, १०४ और ११२ क्रमांक की एंबुलेंस भी कार्यरत हैं। गर्भवती महिलाएं, दुर्घटनाग्रस्त मरीज और ग्रामीण क्षेत्र के रोगी सभी की जान समय पर अस्पताल पहुंचने वाली इन एंबुलेंस सेवाओं पर निर्भर है।
नए एंबुलेंस खरीदने पर होंगे ₹८७२ करोड़ खर्च!
राज्य में मौजूदा सरकारी एंबुलेंस की किसी को परवाह नहीं है, पर नई एंबुलेंस खरीदने की तैयारी हो गई है। इसके लिए लगभग ८७२ करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें से ४९ प्रतिशत राशि स्वास्थ्य विभाग देगा और शेष ५१ प्रतिशत राशि उस संस्था द्वारा खर्च की जाएगी, जिसके माध्यम से यह एंबुलेंस सेवा चलाई जाएगी।
राज्य में पहले से ही सैकड़ों एंबुलेंस अधूरी क्षमता पर काम कर रही हैं या बेकार पड़ी हैं। उनका संचालन भी ढीला है। ऐसे में नए ऑर्डर पर लगभग ८७२ करोड़ रुपए का भारी-भरकम खर्च करना क्या वास्तव में जनता की भलाई के लिए है या सिर्फ महायुति सरकार की ‘दिखावे की योजना’ है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि १०८ क्रमांक की एंबुलेंस पर केवल ‘महाराष्ट्र शासन’ लिखा जाए, किसी कंपनी का नाम नहीं। यह साफ दर्शाता है कि सरकार इसे जनता की जीवनरक्षक सुविधा के बजाय राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रदर्शित करना चाहती है।
