– डाॅ. रवीन्द्र कुमार
वर्ल्ड पैरा-एथलेटिक्स चैम्पियनशिप गेम चल रहे हैं नेहरू स्टेडियम दिल्ली में। टीम अपने अपने कोच भी लाये थे। ऐसे ही केन्या और जापान के कोच अपने अपने खिलाड़ियों को कुछ टिप्स दे रहे थे तभी न जाने कहाँ से कुत्तों का एक दल स्टेडियम में बिना टिकट बिना कम्प्लीमेंट्री पास घुस आया। उन्होने आव देखा न ताव इन दोनों कोचों को काट लिया। कुत्ते पहले ही फुल फॉर्म में थे। वे पूरी ट्रेनिंग के साथ आए थे। बेचारे कोच ! वे तो दहशत में आ गए। उनके देश में कुत्ते इतने अनुशासनहीन न होते हों। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें इंजेक्शन वगैरा लगाया गया, दवा-दारू की गयी। हो सकता है अभी तक वे मात्र दारू पर हों अब दवा भी चालू हो गयी।
कुत्तों ने आखिर विदेशी कोचों को काटा था बावेला मच गया। अथॉरिटी ने कहा हमने स्टेडियम वालों को पत्र लिख दिया था की फलां तारीख से फलां तारीख तक वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप गेम होंगे। हो न हो स्टेडियम वालों ने ये सूचना समय रहते कुत्तों को नहीं दी। इस तरह की विदेशी उपस्थिती यहाँ स्टेडियम में होगी ऐसी उनको कम्यूनिकेशन किसी ने दी ही नहीं। न कोई सर्कुलर, न कोई ऑफिस ऑर्डर, न कोई मीमो। जब अथॉरिटी ने हाथ खींच लिए तो ‘रिसर्च’ शुरू हो गयी। पता चला तीस से ऊपर कुत्ते स्टेडियम में रहे हैं। भई ! वे भी मॉर्निंग वॉक को आते होंगे। कुछ दौड़-भाग की प्रेक्टिस करते होंगे। अब कुत्ता पकड़ने वाले कह रहे हैं कि कुत्तों की संख्या कहीं अधिक है। उनका कहना है तीस से ऊपर कुत्तों को तो हम पहले ही भगा चुके हैं/पकड़े गए हैं।
पता नहीं ये स्टेडियम में इतने गेट होते हैं क्या ? पता चला इक्कीस गेट हैं। अब सोचो ! इक्कीस गेट हैं कोई कितना कुत्तों को रोक पाएगा। गेट पर अगर कोई गार्ड रहा भी होगा तो डर सबको लगता है। गला सभी का सूखता है। वो खुद को बचाए या गेट की चौकीदारी करे। मेरे भारत महान की चिंता ये है कि कहाँ तो हम ओलंपिक करने की सोच रहे हैं, कहाँ ये कुत्तों का टूर्नामेंट। भारत की दावेदारी पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह अनजाने ही लग गया है। एक बात और अब न तो जापान का कोच न केन्या का कोच भारत आने की सोचेगा। आ भी गया तो नेहरू स्टेडियम तो कदापि नहीं आयेगा। जो कोचिंग देनी है, अपने होटल से ही वीडियो कॉल पर दे देगा। नेहरू स्टेडियम नहीं आयेगा। जब मुझे पता चला स्टेडियम का नाम नेहरू स्टेडियम है तो मैं सारा माजरा समझ गया।
(लेखक रेलवे के रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे एक प्रतिष्ठित कवि एवं व्यंग्यकार हैं)
