मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य : मनरेगा आ मजदूरी!

मैथिली व्यंग्य : मनरेगा आ मजदूरी!

डॉ. ममता शशि झा मुंबई

रामरीख शहर मजदूरी कर लेल आयल छलाह। अपन बहिन मैनादाइ आ बहिनोई खेसारीलाल ओत रहके इंतजाम भेल छलनि। बहिनोई नहिये रह देब चाहई छलखिन, मुदा कनियाके आगू हारि गेल छलाह। रामरीख के अबिते मोन भेलनि जे कहिया एत सँ जायब से पूछ के मुदा बहुत साहस जुटेला के बादो पत्नी के डर सँ मुँह स बकार नहिं निकललनि।
खेसारीलाल, ‘ऐंयो अहाँ खेती-बाड़ी छोड़ि के एत कियेक आबि गेलियई, अहाँने‌ पढ़-लिखल छी ने कोनो लूड़ि-ढंग अछि ते कोन काज करब ऐत?
रामरीख, ‘कोनो काज के लेब मुदा खेती नहिं करब, कतहु मजदूरी क लेब।’
खेसारीलाल, ‘मजदूरी कर के छले ते गामेंमे करिहहु एत कियेक एलहुँ, सरकार के मनरेगा के तहत ते १०० दिन के काज अनिवार्य रूप से भेटबाक चाही, आ जँ नहिं त भत्ता के अधिकार रहत‌।’
रामरीख, ‘महराज अहाँके अपन‌ ओत‌ के बात नहिं बुझल अछि, एक ते मजदूरी के लेल अपन नाम रजिस्टर करे लेल घरक लोकसब तैयार नहिं हेता, नाम हँसि हेतनि ताहि दुआरे, आ दोसर हम एक बेर ओहिमे रजिस्टर कर लेल चुपेचाप गेबो केलहुँ, ते सरपंच ककरो बुझ नहिं देथिन ताहि लेल हुनका माछ-भात खुएलहुँ, हुनका संगे संग हुनकर चेला-चपाटि सबके सेहो, सुनमे आयल रहे जे वृक्षारोपण आ पोखरि खोदाब के प्रोजेक्ट भेटलनि हें, आ दुनुमे मजदूर के काज पड़तन। भरि छाक खेलाके बाद सरपंच कहलइथ जे अहिमे किछु कागज पत्तर लागत ओनलाइन रजिस्टर कर पड़इ छई ताहि लेल। अपन एकटा चेला दिस इशारा केलथि जे ई सब बात बुझा देत। हुनकर चेला जे सब कागज कहलक सबकिछु हमरा लग छल ते हुनकर मोन छोट भे गेलनि। ओ सरपंच दिस किछु इशारा केलखिन ते सरपंच बजला जे सबटा पेपर नबका बनाब पड़त नाम बदलि के बैंकमे नबका खाता खोल पड़त कियेक ते अहि डोक्युमेंट के आधार पर मजदूरी कर लेल अहाँके नाम नहिं पठा सकई छी। हिनका किछु टका दे दियउन सब काज भे जायत आ अहाँके कहियो कोदारि ले के ने गाछि गाछ रोप लेल जाय पड़त आ ने पोखरि खुन लेल!’
हम आश्चर्ज स पूछलियनि, ‘से कोना होयत?’
सरपंच के एकटा चेला, ‘महराज अहाँके मुदा अनेरोके गप्प सब होइया यो ठेका भेट स पहिने सरपंच पोखरि खुनाबके आ गाछ रोप के फोटो आ भिडियो बनबाक राखि लेने छथिन, मोन नहिं अछि कनिये दिन पहिने ओ अपन गाछ सब रोपलखिन आ पोखरि खुनेलखिन ओहिके कॉन्ट्रैक्ट भेटलनि हें!’ आब अहिं कहु अहि धुरफंदीमे कोना विश्वास करितहुँ! पाईयो ले लिते आ काजो नहिं करिते ते हम की बिगाड़ि लितियई,जाईतो गमबितऊँ आ स्वादों ने पबितआऊँ!
खेसारीलाल अबाक भे क सबटा गप्प सुनि रहल छलाह!

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