संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबई में अधिक से अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन सेवा का उपयोग कर सकें और मुंबई की ट्रैफिक समस्या से लोगों को राहत मिले, इसलिए मुंबई शहर व आस-पास चरणबद्ध तरीके से मेट्रो का निर्माण किया जा रहा है। मुंबई शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवा में सबसे ज्यादा ८० लाख यात्री लोकल ट्रेन से और उसके बाद ३० लाख यात्री बेस्ट परिवहन सेवा का उपयोग करते हैं। लोकल और बेस्ट बस का किराया कम होना और रियायती दर पर मासिक और त्रैमासिक पास के कारण भी ऐसा मुमकिन हो पाया है। मेट्रो में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि लोकल ट्रेन में जहां वातानुकूलित ट्रेन में सफर करने पर १० किलोमीटर के लिए २५ रुपया किराया है, वहीं वातानुकूलित बस में १० किलोमीटर का किराया २० रुपया है, जबकि मेट्रो ट्रेन में २ किलोमीटर के लिए १० रुपए और १० किलोमीटर के लिए ४० रुपया देना पड़ता है, जिसके कारण आम आदमी की जेब पर अधिक बोझ पड़ता है और वह मेट्रो ट्रेन का उपयोग करने से कतराता है। लोगों का कहना है कि भूमिगत मेट्रो में शुरू के दो किलोमीटर का किराया १० रुपया है और अगर मेट्रो में ४ किलोमीटर तक का किराया १० रुपया कर दिया जाएगा तो कम दूरी का सफर करनेवाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और अधिक से अधिक यात्री मेट्रो का उपयोग कर सकेंगे। भूमिगत मेट्रो-३ का काम २०२२ में ही पूरा करने की डेडलाइन थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें देरी होती गई और इसका खर्च २२,००० करोड़ से बढ़कर ३७,००० करोड़ से भी अधिक हो गया। पिछले साल अक्टूबर महीने में आरे जेवीएलआर से बीकेसी तक और बाद में बीकेसी से आचार्य अत्रे चौक वरली तक का उद्घाटन किया गया। आरे जेवीएलआर से बीकेसी तक का किराया ५० रुपए था और बीकेसी से आचार्य अत्रे चौक वरली का किराया १० रुपए बढ़ाकर ६० रुपए कर दिया गया और अब अंतिम चरण में भी आचार्य अत्रे चौक वरली से कफ परेड तक का किराया सिर्फ १० बढ़ाकर ७० रुपए कर दिया गया, जबकि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस या चर्चगेट से कफ परेड जाने के लिए २० रुपए किराया देना पड़ेगा। मुंबई मेट्रो ३ के किराए की तुलना अगर अन्य मेट्रो लाइन से किया जाय तो इसका किराया बहुत महंगा है, विशेषत: कम दूरी के यात्रियों के लिए। भूमिगत मेट्रो में २ किलोमीटर तक का किराया १० रुपया है, जबकि अन्य मेट्रो में ३ किलोमीटर तक का किराया १० रुपया है।
भूमिगत मेट्रो के किराया स्लैब में बदलाव जरूरी
भूमिगत मेट्रो की टिकट दर के स्लैब में २ किलोमीटर की जगह ४ किलोमीटर का स्लैब करके अगर किराया रखा जाय तो लाखों मुंबईकरों को इसका फायदा होगा और लोग मेट्रो का अधिकतम उपयोग करेंगे। महाराष्ट्र सरकार को चाहिए कि मेट्रो का लोग अधिक उपयोग कर सकें इसके लिए किराए के स्लैब में बदलाव करे और लोगों को अधिक से अधिक मेट्रो की तरफ आकर्षित करे। मुंबई में बस का किराया भी ५ किलोमीटर के स्लैब पर आधारित है और इसका सामान्य बस का किराया १० रुपया और वातानुकूलित बस का किराया १२ है।
