कविता श्रीवास्तव
सड़कों के गड्ढों से दु:खी आम जनता के हित में अदालत ने अच्छा आदेश जारी किया है। इससे सड़क निर्माण के काम में `थूक लगाने वाले’ ठेकेदार और लापरवाह अधिकारी दोनों नप जाएंगे। सड़क काम में भ्रष्टाचार भारी पड़ेगा। जिम्मेदार लोगों के कान पकड़े जाएंगे। मुंबई हाई कोर्ट ने अपने एक ताजा आदेश में कहा है कि सड़कों के गड्ढों का शिकार बनने वालों को ठेकेदार अपने फंड से मुआवजा देंगे। संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी। कोर्ट का यह पैâसला देर से जरूर आया है, लेकिन यह एक दुरुस्त आदेश है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सड़कों की दुरावस्था को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सड़क हादसों के मामले महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हुए हैं। मुंबई में सड़कों और फुटपाथ पर तो अवैध फेरीवालों का ही सर्वाधिक कब्जा है। इसलिए यहां ज्यादा हादसे होते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने २०० से अधिक अधिक स्थानों को `डेथ पॉइंट’ के रूप में भी चिह्नित किया हुआ है। अबसे गड्ढों के लिए नगर निगम और सड़क एजेंसियां सीधे जवाबदेह होंगी। ठेकेदार के फंड से मृतकों के परिवार को पचास हजार से छह लाख रुपए तक का मुआवजा देना होगा। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। वैसे नियम तो पहले से ऐसे ही हैं। लेकिन अब नगर निगमों, सड़क एजेंसियों और ठेकेदारों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। जांच के लिए कमेटी बनेगी। सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य होगा। नागरिक शिकायत पर तीन हफ्ते में कार्रवाई करके उसका अपडेट देना होगा। अच्छी और सुरक्षित सड़कें होना मूलभूत, संवैधानिक और कानूनी आवश्यकता है। अच्छी सड़कें जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने साफ कहा है कि जब तक गड्ढों से होने वाले हादसों के लिए जिम्मेदार लोगों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा और उन्हें अपनी जेब से आर्थिक जिम्मेदारी उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक वे इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझेंगे। उल्लेखनीय है कि टोल और अन्य राजस्व के रूप में करोड़ों रुपए नागरिकों से वसूले जाते हैं। इसके बावजूद सड़कों की दयनीय स्थिति नागरिकों के प्रति उदासीनता को दर्शाती है। अदालत ने कहा है खराब और असुरक्षित सड़कों का कोई औचित्य ही नहीं हो सकता। अकेले मुंबई से केंद्र, राज्य और महानगरपालिका को भारी मात्रा में राजस्व मिलता है। मुंबई महानगरपालिका एशिया का सबसे बड़ा निगम है। यदि यहां सड़कें खराब रहेंगी तो मानव जीवन खतरे में रहेगा। देश की आर्थिक राजधानी होने से यहां की कारोबार पर भी फर्क पड़ेगा। हम जानते ही हैं कि सड़कें हमारी जीवन रेखाएं हैं। सड़कों के बिना जीवन ही संभव नहीं है। मनुष्यों और सामानों के आवागमन के लिए सड़क मार्ग आवश्यक है। इसी से रोजगार, आर्थिक व्यवस्था, सामाजिक चहल-पहल, जनजीवन सब कुछ चलता है। सड़कें ही यातायात को सुगम बनाती हैं, लेकिन ये सड़कें ही हमेशा दुखदाई होती हैं। उम्मीद है कि अदालती आदेश के बाद यह दु:ख खत्म या कम जरूर होगा।
