सामना संवाददाता / मुंबई
झुग्गीवासियों का बकाया वसूलने के लिए डेवलपर्स की संपत्तियां जब्त करने संबंधी संशोधित कानून पारित होने के बाद किराया वसूली तेजी से शुरू हो गई है। अब तक झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (झोपु) ७३५ करोड़ रुपए का बकाया किराया वसूलने में सफल रहा है, जबकि डेवलपर्स ने ३०७ नई योजनाओं में ९०२ करोड़ रुपए का किराया चुकाया है। अब तक झुग्गीवासियों को १,६०० करोड़ रुपए किराए के रूप में वितरित किए जा चुके हैं। फिर भी ६४६ करोड़ रुपए अभी भी किराए के रूप में बकाया हैं।
झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना में अग्रिम किराये का आदेश
झुग्गी पुनर्विकास करने वाले डेवलपर के लिए झुग्गीवासियों का किराया चुकाना अनिवार्य है। लेकिन डेवलपर्स द्वारा किराया चुकाने में आनाकानी के कारण किराए का बकाया १,४०० करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। इस संबंध में उच्च न्यायालय ने भी झुग्गी प्राधिकरण से नाराजगी जताई थी। इसलिए, प्राधिकरण ने एक परिपत्र जारी कर झोपु योजना में दो साल का अग्रिम किराया जमा करने और अगले वर्ष के लिए अग्रिम चेक जारी करने का आदेश दिया। केवल उन डेवलपर्स को झोपु योजना को लागू करने की अनुमति दी गई जिन्होंने इस परिपत्र के प्रावधानों को पूरा किया। प्राधिकरण के इस आदेश के कारण काफी मात्रा में किराया एकत्र किया गया। प्राधिकरण के वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ महेंद्र कल्याणकर ने भी किराया संग्रह के लिए एक कदम आगे बढ़ाया और एक किराया प्रबंधन प्रणाली शुरू की। इसके कारण किराए की शिकायतों को सीधे मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा देखा जाएगा।
