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संपादकीय : सरकार पुरस्कृत ‘पेपर लीक’

शिक्षा का जनाजा निकालकर, छात्रों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ इस वक्त चल रहा है, उसका मुख्य केंद्र फिलहाल महाराष्ट्र बना हुआ है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं और उनकी नजर में यह तमाशा बेहद मामूली बात है। पिछले महीने हुए ‘नीट’ पेपर लीक का केंद्र भी महाराष्ट्र में ही था और अब ‘टीईटी’ का पेपर लीक हो गया। यह महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ना है। राज्य के लाखों युवक-युवतियों ने शिक्षक के पेशे को अपनाने के लिए ‘टीईटी’ परीक्षा की तैयारी की थी। २८ जून को यह परीक्षा होनेवाली थी, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। यह पेपर ठाणे जिले के भिवंडी में लीक हुआ। यह महज एक सामान्य घटना नहीं है, बल्कि सत्ताधारी महायुति सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और उससे पैदा हुए एक आसुरी चक्रव्यूह के साथ-साथ युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ किए गए विश्वासघात की काली कहानी है। महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा पर कालिख पोतने वाली ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। जिस महाराष्ट्र ने देश में शिक्षा और समाज सुधार की नींव रखी, उसी महाराष्ट्र को आज हर दिन गर्त में गिरते हुए देखना पड़ रहा है। प्रगतिशील महाराष्ट्र की आत्मा की जैसे हत्या ही की जा रही है। ‘पेपर लीक होना’ अब विधायकों और सांसदों के टूटने-बिकने जैसा सामान्य हो गया है। टूटने वाले सांसदों और विधायकों को तो पचास-पचास करोड़ मिलते हैं, लेकिन पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य तबाह हो जाता है। इसलिए महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री को एक दिन भी अपने पद पर रहने का अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गृहमंत्री के रूप में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। राजनीतिक फायदे के लिए और भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए गृह विभाग का इस्तेमाल किया जा रहा है। महाराष्ट्र को एक पूर्णकालिक गृहमंत्री की जरूरत है। अगर देवेंद्र फडणवीस गृह विभाग के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें खुद यह विभाग छोड़ देना चाहिए; लेकिन क्या महाराष्ट्र के सत्ताधारियों में
इतनी नैतिकता
बची है? बिक चुके विधायकों और सांसदों के लिए आधी पुलिस फोर्स तैनात की जा रही है। गृहमंत्री को पेपर की सुरक्षा से ज्यादा गद्दारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण लगती है। क्योंकि इन लोगों ने छात्रों को इतना लाचार और बेबस बना दिया है कि वे आखिर चिढ़कर भी क्या कर लेंगे? उन्हें कॉकरोच समझकर कुचल दिया जाएगा। इसीलिए ‘टीईटी’ परीक्षा का पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के बावजूद, ठंडी आहें भरने के अलावा ये परीक्षार्थी कुछ नहीं कर सकते। ‘टीईटी’ सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, बल्कि एक बेहतरीन शिक्षक बनने की पहली सीढ़ी है। मगर अफसोस, भविष्य की पीढ़ी को गढ़ने वाले शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में ही घोटाला और धांधली शुरू है। महाराष्ट्र का भविष्य कितने भयानक माफियाओं के हाथों में चला गया है, यह उसका एक चौंकाने वाला सबूत है। पेपर लीक माफिया, उसके तमाम दलाल और भ्रष्ट अधिकारी, यह एक पूरा रैकेट है और इस रैकेट को जब तक सत्ताधारियों का मजबूत वरदहस्त न मिले, तब तक ‘पेपर’ लीक नहीं हो सकते। ‘नीट’ का पेपर लीक करने वाली कड़ियों के तार भाजपा से जुड़े हैं। ‘टीईटी’ का पेपर लीक करने वाले भी इसी सकल भाजपा परिषद के सदस्य हैं। परीक्षा से चौबीस घंटे पहले लीक हुए पेपर सोशल मीडिया पर तैरते रहते हैं और सरकार सिर्फ ‘जांच’ के नाम पर वक्त काटती है। ‘नीट’ मामले का गैंग पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर और नासिक में सक्रिय था। ‘टीईटी’ मामले में भिवंडी का नाम सामने आया है। महाराष्ट्र में ही बार-बार पेपर लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं, क्या इसका जवाब गृहमंत्री फडणवीस दे पाएंगे? शिक्षा विभाग राजनीतिक घुसपैठियों और एक खास विचारधारा के बदमाशों का हथियार बन चुका है। अपने ही विचार के लोगों को शिक्षा क्षेत्र में घुसाया जा सके, इसीलिए सीधे पेपर लीक करवाकर उनका कल्याण किया जा रहा है, क्या यह बात गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मालूम नहीं है? परीक्षा आयोजित करने वाली हर एक एजेंसी पर
भाजपा और संघ का कब्जा
है। सभी कुलपतियों, परीक्षा नियंत्रकों और शिक्षा बोर्ड के अध्यक्षों को भाजपा ने नियुक्त किया है। इसलिए महाराष्ट्र में पेपर लीक की जिम्मेदारी भाजपा को लेनी ही होगी। फिलहाल विधानसभा का सत्र चल रहा है और विधायकों को छात्रों के भविष्य के साथ चल रहे इस तमाशे पर सदन का कामकाज रोक देना चाहिए। राहुल गांधी ने पेपर लीक मामले पर जो बात कही है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा है, ‘Another paper leak, another exam cancelled. This is theft of the youth’s future.’ यानी यह सिर्फ पेपर लीक होना नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों, उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को चुराने की एक साजिश है। पटना में एक कोचिंग क्लास में आग लग गई और २० छात्रों की मौत हो गई। उससे पहले ‘नीट’ परीक्षा के पेपर लीक ने देशभर के हजारों छात्रों के भविष्य का कबाड़ा कर दिया। अब महाराष्ट्र में ‘टीईटी’ पेपर लीक से हजारों युवाओं का भविष्य जलकर खाक हो गया। इसका प्रायश्चित कौन करेगा? प्रधानमंत्री मोदी युवाओं को नए सपने दिखाते हैं और विदेशों में घूमने चले जाते हैं। उन्हें युवाओं का भविष्य संवारने से ज्यादा विधायकों और सांसदों को तोड़ने में ज्यादा दिलचस्पी है। महाराष्ट्र की पूरी शिक्षा व्यवस्था सड़ चुकी है। इतने संगीन अपराध होने के बावजूद किसी को सजा नहीं होती, इसीलिए सरेआम पेपर लीक करने का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य सामूहिक नकल और सरकार पुरस्कृत नकल के लिए बदनाम थे; महाराष्ट्र ने तो इससे भी एक कदम आगे बढ़ा दिया है। यहां सरकार पुरस्कृत ‘पेपर लीक’ का यह नया धंधा बड़े जोर-शोर से शुरू है। जो लोग राम मंदिर की दानपेटी तक को लूटने से बाज नहीं आए, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है!

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