मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति की कुव्यवस्था कैलाश यात्रा पर संकट!

महायुति की कुव्यवस्था कैलाश यात्रा पर संकट!

-काठमांडू में फंसे राज्य के २०० श्रद्धालु

-मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, ‘हमें निकालिए…’

सुनील ओसवाल / मुंबई

भगवान शिव के दर्शन की आस लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले महाराष्ट्र के करीब २०० श्रद्धालुओं की आस्था इस समय प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सभी जरूरी दस्तावेज और परमिट होने के बावजूद चीन का वीजा नहीं मिलने से ये श्रद्धालु कई दिनों से नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हुए हैं। सरकार की ओर से आश्वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन समाधान अभी भी दूर है।
वैâलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले महाराष्ट्र के करीब २०० श्रद्धालु नेपाल की राजधानी काठमांडू में पिछले कई दिनों से फंसे हुए हैं। यात्रा के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज, परमिट और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद चीन की ओर से वीजा जारी नहीं होने से श्रद्धालुओं की यात्रा अधर में लटक गई है। इस पूरे मामले ने सरकार की तैयारी और समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मुंबई ,पुणे, समेत महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर काठमांडू पहुंचे थे। उनके पास यात्रा परमिट भी मौजूद है, लेकिन चीनी दूतावास से वीजा नहीं मिलने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। होटल में ठहरने और अन्य खर्चों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जबकि श्रद्धालु मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि वीजा प्रक्रिया में बाधा की आशंका पहले से थी तो सरकार और संबंधित एजेंसियों को यात्रियों को समय रहते स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी। यात्रा शुरू होने के बाद इस तरह की स्थिति पैदा होना प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करता है।
अब तक ठोस समाधान नहीं
मामला तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार और सांसद सुप्रिया सुले ने श्रद्धालुओं से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक भी श्रद्धालुओं के परिजनों ने गुहार लगाई है। हालांकि, अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है और श्रद्धालु काठमांडू में इंतजार करने को मजबूर हैं।
प्रभावी हस्तक्षेप की जरूरत
सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से चीन सरकार से संपर्क किया है। सोमवार को वीजा संबंधी निर्णय आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल, सभी श्रद्धालु सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल आश्वासन से यात्रियों की परेशानी दूर होगी या सरकार समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप कर उन्हें राहत दिलाएगी?

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