मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं दोमुंहा व्यवहार नहीं कर सकता!’-महेश मांजरेकर

‘मैं दोमुंहा व्यवहार नहीं कर सकता!’-महेश मांजरेकर

अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहनेवाले महेश मांजरेकर न केवल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, बल्कि वो फिल्मों के साथ टीवी और स्टेज पर निर्देशन के साथ अभिनय करते नजर आते हैं। समय-समय पर अपनी भावनाएं व्यक्त करनेवाले निर्माता-निर्देशक महेश मांजरेकर फिल्म ‘पुन्हा शिवाजीराजे भोसले’ लेकर आए हैं, जो हाल ही में रिलीज हुई है। पेश है, महेश मांजरेकर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय’ की रिलीज के बाद ‘पुन्हा शिवाजीराजे भोसले’ को १८ साल क्यों लग गए?
सचिन खेडेकर अभिनीत फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय’ २००९ में आई थी, जिसमें सचिन की समस्याओं का समाधान छत्रपति शिवाजी महाराज करते हैं। ३१ अक्टूबर को रिलीज हुई ‘पुन्हा शिवाजीराजे भोसले’ किसान आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे पर केंद्रित है। हमारी फिल्म का संदेह है कि ‘आत्महत्या कोई समाधान नहीं है, किसान भाइयों…’

आपने सिद्धार्थ बोडके की कास्टिंग कैसे की?
मैंने ‘पुन्हा शिवाजीराजे भोसले’ के लिए पहले ही तय कर लिया था कि मैं एक ऐसे अभिनेता को चुनूंगा, जिसने न तो कभी छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाया हो और न ही उसकी कोई छवि हो। मैंने सिद्धार्थ बोडके को चुना और उन्होंने इस किरदार को बखूबी निभाया है। सिद्धार्थ एक हीरा है, यह तो पक्का है!

क्या आप अपनी फिल्मों को एक सामाजिक प्रतिबद्धता मानते हैं?
मैं मध्यमवर्गीय परिवार में पला-बढ़ा हूं और फिल्मी दुनिया से मेरा कोई नाता नहीं रहा। मेरे बचपन के दोस्त मिल मजदूरों के बच्चे थे। हमने मिल मजदूरों की हड़ताल देखी। कुछ बच्चे जो अच्छा क्रिकेट खेलते थे, अंडरवर्ल्ड में चले गए। भूख ने उन्हें अपराध की ओर अग्रसर किया। मैं सिर्फ मनोरंजन के नजरिए से फिल्में नहीं बना सकता। हो सकता है ये मेरी कमी हो, लेकिन मेरी फिल्मों का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं है। मुझे जब तक कोई अच्छा विषय नहीं मिलता, मैं फिल्में नहीं बनाता।

अफवाह है कि ‘वास्तव-२’ बन रही है?
‘वास्तव-२’ की स्क्रिप्ट अभी तैयार नहीं हुई है। मैंने ‘वास्तव-२’ की आधी यानी इंटरवल तक ही स्क्रिप्ट लिखी है। अब मैं इंटरवल के बाद की स्क्रिप्ट लिख रहा हूं। मैं इसे २०२६ में शुरू करने की योजना बना रहा हूं, लेकिन अभी पक्के तौर पर कुछ कह नहीं सकता।

आप एक ही समय में अभिनय, निर्देशन और फिल्मों का निर्माण कैसे करते हैं?
इसमें मुश्किल क्या है? कई लोग ऐसे हैं जो एक ही समय में कई रचनात्मक कार्यों में खुद को झोंक देते हैं। मुझे लगता है, इंसान को एक ही जन्म मिलता है, इस जन्म में उसे वो करना चाहिए जो उसे पसंद हो और जिसमें उसे मजा आए। मैं बहुत बेचैन रहता हूं जब अपनी कोशिशों में नाकाम होता हूं। मैं उसे स्वीकार करने के लिए तैयार रहता हूं और मैंने ऐसी असफलताओं को स्वीकार किया है। इसलिए मैं नाकामी के डर से तरह-तरह की कोशिशें करने से नहीं कतराता।

क्या बेटी सई मांजरेकर को दोबारा लॉन्च करने की कोई योजना है?
सई में एक अभिनेत्री जैसी खूबसूरती है, लेकिन मैं नियति में विश्वास रखता हूं। अगर नियति साथ दे तो बहुतों को मौके मिलते हैं और अगर साथ न दे तो काबिल लोग भी हाथ से निकल जाते हैं। लेकिन सई की खासियत है कि वो काम पाने या मशहूर होने के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं करती। उसे एक्टिंग में रुचि है, लेकिन कामयाबी की ख्वाहिश नहीं है। कामयाबी न मिलने पर वो उदास नहीं होती और उसके मन में यह खयाल कभी नहीं आता कि अमुक को फिल्म मिल गई तो मुझे क्यों नहीं मिली। सई बहुत ईमानदार है, निष्ठा से काम करती है, लेकिन उतनी ही स्वाभिमानी भी है। वो किसी से काम नहीं मांगेगी और अपने पिता द्वारा फिल्म बनाने पर भी उसे कोई एतराज नहीं है। उसे जब भी सही मौका मिलेगा, वो जरूर फिल्म करेगी।
क्या आप दोबारा चुनाव लड़ेंगे?
मेरा दोबारा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। राजनीति में चुप रहनेवालों की जरूरत होती है। मैं दोमुंहा व्यवहार नहीं कर सकता। मुझे लगता है मेरे स्वभाव में जल्दबाजी है, राजनीति में ऐसे लोगों का क्या काम?

 

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