सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही ठाणे और नई मुंबई में शिंदे गुट और भाजपा के बीच टकराव शुरू हो गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सबक सिखाने के लिए भाजपा ने नई मुंबई से दिग्गज नेता गणेश नाईक को मंत्री पद दिया और नाईक ने शिंदे के गढ़ ठाणे में जनसभा कर शिंदे गुट को चुनौती देना शुरू कर दिया।
गौरतलब हो कि पिछले कुछ महीनों से नाईक द्वारा शिंदे की तीखी आलोचना की जा रही है। शिंदे गुट भी उस आलोचना का जवाब दे रहा है। अब शिंदे ने नाईक से बदला लेने के लिए नई मुंबई में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी तैयारी के तहत माथाड़ी कामगार संघ के महासचिव और अन्नासाहेब पाटील आर्थिक विकास निगम के अध्यक्ष नरेंद्र पाटील से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नजदीकियां बढ़ा ली हैं, ऐसी चर्चा है।
बता दें कि माथाड़ी नेता नरेंद्र पाटील भाजपा के चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। भाजपा का यही चेहरा अब शिंदे के करीब पहुंच रहा है। नई मुंबई में ३० अक्टूबर को पश्चिमी महाराष्ट्र के रहिवासियों के लिए आयोजित संवाद बैठक में स्थानीय भाजपा नेताओं को आमंत्रित किए बिना उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी के मंत्रियों और पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। नरेंद्र पाटील की यह कार्रवाई काफी संकेत देने वाली मानी जा रही है।
बताया जाता है कि नई मुंबई में बैठक के माध्यम से महानगरपालिका चुनाव के परिप्रेक्ष्य में नए समीकरणों को तैयार किया जा रहा है। बता दें कि गत गुरुवार को एपीएमसी स्थित प्याज-आलू मंडी में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। नई मुंबई में माथाड़ी नेता पाटील द्वारा आयोजित इस सभा में मंत्री उदय सामंत और शंभूराज देसाई, सांसद नरेश म्हस्के और एकनाथ शिंदे को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वन मंत्री गणेश नाईक और बेलापुर की भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे को आमंत्रित नहीं किया गया था।
