सामना संवाददाता / मुंबई
राजनीतिक पार्टियां वोट चोरी के खिलाफ लड़ रही हैं, पर यह लड़ाई इतने तक ही सीमित नहीं है। आज से जहां-जहां वोट चोर दिखेंगे, वहां उन्हें फटकाओ, लोकतांत्रिक मार्ग से फटकाओ। इस तरह का आह्वान शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य के मतदाताओं से किया। कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए, पर यदि आप कानून की लाठी चलानेवाले बनेंगे तो उस लाठी का क्या करना है, यह निर्णय भी महाराष्ट्र की जनता करने में सक्षम है।
इस तरह की चेतावनी भी उद्धव ठाकरे ने सत्ताधारी भाजपा को दी।
पूरे ठाकरे परिवार का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए एक बड़ी साजिश रची जा रही है। इस तरह का चौंकानेवाला दावा उद्धव ठाकरे ने किया। उन्होंने इस दौरान अपने नाम से किए गए एक फर्जी आवेदन का धक्कादायक उदाहरण दिया। उन्होंने उस आवेदन के नीचे लिखी गई टिप्पणी को पढ़कर सुनाया। उक्त आवेदन के संबंध में आवेदक से मुलाकात कर आवेदन की जांच की गई, इस दौरान यह अभिप्राय प्राप्त हुआ कि यह आवेदन हमने नहीं किया है इसलिए उक्त आवेदन रद्द किया जाता है, ऐसा उस टिप्पणी में लिखा था। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस व्यक्ति ने यह आवेदन किया ही नहीं और जिसे यह भी नहीं पता कि उसके नाम से कोई आवेदन किया गया है। फिर भी उसके नाम से आवेदन दाखिल किया गया है। अब बताइए, इस ‘आवेदक’ को खोजें तो कहां खोजें? जिस आवेदक ने यह आवेदन किया है, उसका नाम है, उद्धव बालासाहेब ठाकरे! यह सुनते ही उपस्थित लोगों की हंसी फूट पड़ी।
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि यह ‘उद्धव ठाकरे’ नामक व्यक्ति ऑनलाइन वेरिफिकेशन आवेदन करता है और असली उद्धव ठाकरे को इसकी खबर तक नहीं। आवेदन पर लिखा मोबाइल नंबर भी फर्जी है। यह सुनकर सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने आगे कहा कि दो दिन पहले ‘मातोश्री’ पर चुनाव आयोग के अधिकारी आए थे। उन्होंने इस आवेदन के बारे में हमसे पूछताछ की। आवेदन पर लिखा टेलीफोन नंबर भी झूठा था। जब सब से पूछा तो किसी ने भी ऐसा आवेदन करने की बात नहीं कही। यह आवेदन २३-१०-२०२५ को ‘सक्षम’ नामक ऐप से किया गया था। इस बारे में हमने औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि मेरे नाम से किसी ने फर्जी नंबर के जरिए ओटीपी निकालने की कोशिश की है। हैक करने का प्रयास हुआ है। शायद यह मामला १४ या १५ तारीख को शुरू किया गया और २३ तारीख को आवेदन दाखिल किया गया। ऐसा कर मेरे समेत मेरे परिवार के चारों सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई है, क्या यह अब जांचा नहीं जाना चाहिए। निश्चित ही इसमें कोई साजिश है। इस तरह का संशय उद्धव ठाकरे ने व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि इतने सालों से हम मतदान करते आ रहे हैं, मैं एक राजनीतिक पक्ष का प्रमुख हूं। चुनाव प्रचार करता हूं और इतनी सरल बात हमें समझ में नहीं आएगी क्या? इस तरह का पलटवार उद्धव ठाकरे ने किया। उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि जयंत पाटील ने कहा था कि चुनाव आयोग का सर्वर किसी के ऑफिस में है और विजय वडेट्टीवार ने तो एक व्यक्ति का नाम भी बताया था। किसका नाम जोड़ना है, किसका हटाना है और कौन कितनी बार मतदान करेगा, ऐसी पूरी व्यवस्था, ऐप समेत, भाजपा के हाथ में है।
अदालत लेकर जाएंगे वोट चोरी के सबूत
वोट चोरी के सभी सबूतों के साथ आनेवाले कुछ दिनों में अदालत में जाने की घोषणा भी उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर की। उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आता है, भाजपा की दबाव की राजनीति शुरू हो जाती है इसलिए हम ईमानदारी से कानूनी रास्ता अपना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अदालत में न्याय कब मिलेगा, इसकी भी परीक्षा होगी। चुनाव आयोग तो पहले से ही लाचार हो चुका है। शिवसेना का मामला सर्वोच्च न्यायालय में पिछले तीन-चार सालों से चल ही रहा है, लेकिन अब हमें न्याय मिलना ही चाहिए। सभी साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद हमें न्याय मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अदालत से न्याय मिलेगा ही। इस पर हमें विश्वास है और अगर नहीं मिला, तो जनता की अदालत वोट चोरों के साथ क्या करना है, इसका निर्णय करने में सक्षम है।
बंद हुई मुट्ठी की तस्वीरें वोट चोरों के बादशाह के पास भेजो
स्थानीय लोगों, हिंदू और महाराष्ट्र के लिए हम ठाकरे भाई एक साथ आए हैं। ऐसे समय में जब हम आगे बढ़ रहे हैं तो मजबूती से साथ देना जनता का कर्तव्य है। साथ देने की ताकत दिखानी हो तो दोनों हाथों की मुट्ठी बांधकर दिखाओ, ऐसा आह्वान उद्धव ठाकरे ने उपस्थित लाखों की भीड़ से किया। यह बात समझते ही सभी ने मुट्ठी बांधकर दोनों हाथ ऊपर कर दिए। महाराष्ट्र ने एकता की मुट्ठी बांधी है यह दिखाने के लिए फोटोग्राफरों को वह फोटो वोट चोरों के बादशाह के पास भेजने का आग्रह भी इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने किया।
यह नहीं कि शिवसेना और विरोधी पार्टियां कह रही हैं कि वे चुनाव होने ही नहीं देंगी। हमें चुनाव चाहिए। लोकतंत्र के मार्ग से सख्ती से लड़ने के लिए हम तैयार हैं, पर अगर दोषी लोग और चोरी करके सत्ताधारी पहले से ही नतीजा तय कर रहे हों तो फिर जनता को तय करना चाहिए कि चुनाव होने दिए जाएं या नहीं।
हम लोग जनता के लिए नेतृत्व कर रहे हैं। सब पार्टी भेद, मतभेद को किनारे रखकर देश में लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए हम एक साथ आए हैं। मैं किसी चीज के लिए कुछ पाना नहीं चाहता। आंखों के सामने लोकतंत्र का कत्ल हो रहा है और कत्ल करनेवाले शान-ओ-शौकत से उस कुर्सी पर बैठे हैं। उनके चरणों में साष्टांग दंडवत करके चापलूसी करने के लिए हमारी जनता ने नहीं सिखाया और ऐसी लाचारी दिखाने वाली औलाद महाराष्ट्र ने कभी देखी ही नहीं।
