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साइबर ठगों का नया हथकंडा : पासपोर्ट भेजने के नाम पर शिक्षिका से ९.६० लाख की ठगी!

– फर्जी हेल्पलाइन नंबर ने किया कंगाल
– फोन लगाते ही बैंक खाता हो गया खाली
सुरेश गोलानी / मुंबई
बात-बात पर गूगल से नंबर निकालकर कॉल करनेवालों के लिए यह खबर काम की है। साइबर ठग रोज नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। ठगी का ऐसा ही एक मामला मीरा रोड के नया नगर इलाके से सामने आया है, जहां पासपोर्ट भेजने के नाम पर साइबर ठगों ने एक ४९ वर्षीय शिक्षिका के बैंक खातों से ९ लाख ६० हजार रुपए उड़ा लिए।
नया नगर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने अपना और अपने माता-पिता का पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। २४ अक्टूबर २०२५ को शिकायतकर्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर दो एसएमएस प्राप्त हुए, जिसमें बताया गया कि उनका और उनके पिता का नया पासपोर्ट भारतीय डाक द्वारा स्पीड पोस्ट से उनके पंजीकृत पत्ते पर भेज दिया गया है।
गूगल पर मिले नंबर पर लगाया फोन
अपनी मां के पासपोर्ट की स्थिति जानने को उत्सुक शिकायतकर्ता ने भारतीय डाक विभाग के स्पीड पोस्ट का हेल्पलाइन नंबर गूगल पर खोजा और बदकिस्मती से फर्जी नंबर पर कॉल कर दिया। अपने आपको डाक विभाग से जुड़े कस्टमर केयर का कर्मचारी बताकर ठग ने शिकायतकर्ता को यह कहकर झांसे में लिया कि उनकी मां का पासपोर्ट गलत पिन कोड के कारण ठाणे के किसी अन्य पते पर भेज दिया गया है।
ठग ने भेजा लिंक, जिससे हो गया कांड
फोन पर पते को सही करने के नाम पर ठग ने शिकायतकर्ता को एक लिंक भेजकर ऐप डाउनलोड करवाया और फॉर्म में विस्तृत जानकारी भरने को कहा। ठगों की बातों में आकार शिकायतकर्ता ने फॉर्म भर दिया, जिसके बाद उनके बैंक खातों से ९ लाख ६० हजार रुपए अन्य खातों में ट्रांसफर कर लिए गए। नया नगर पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। ज्ञात हो कि साइबर अपराधी गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट्स में फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा रहे हैं।

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