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शिंदे-चव्हाण की जंग में उल्हासनगर भाजपा की डूबेगी नैया! …दस से अधिक सीटें नहीं जीत पाएगी बीजेपी

सुरक्षित सीट की तलाश में हैं इच्छुक उम्मीदवार
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे जिले में शिंदे गुट के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवीद्र चव्हाण के बीच चल रही जंग का सबसे अधिक फटका उल्हासनगर महापालिका चुनाव में भाजपा को लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इन दोनों नेताओं की जंग के कारण उल्हासनगर में भाजपा की नैया डूबनी तय मानी जा रही है। यही कारण है कि मनपा का चुनाव लड़ने वाले भाजपा के इच्छुक उम्मीदवार सुरक्षित सीट चुनने की तलाश में लगे हुए हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अगर उल्हासनगर में भाजपा और शिंदे गुट की युति नहीं होती है तो भाजपा को दस सीट भी निकालना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि शिंदे गुट ने ओमी कालानी टीम से गठबंधन कर लिया है। टीम ओमी कालानी से गठबंधन का सबसे अधिक प्रतिकूल असर भाजपा को पड़ेगा। क्योंकि शिंदे गुट के जो पूर्व नगरसेवक है। उस प्रभाग में भाजपा की कोई लड़ाई ही नहीं है। जो लड़ाई वह सिंधी बाहुल्य वाले प्रभाग में टीम ओमी कालानी और भाजपा के बीच में है। भाजपा के वरिष्ठ नेता का दावा है कि यह बात भाजपा के स्थानीय नेता अच्छी तरह से जानते है। लेकिन चव्हाण और डॉ शिंदे के समर्थक अपनी तथाकथित ’चमचागीरी’ के चक्कर में युति का विरोध कर रहे है।
बताया जाता है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में प्रदेश भाजपा कार्यालय में उल्हासनगर पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। जिसमें भाजपा जिला अध्यक्ष रोजश वदरिया और विधायक कुमार आइलानी ने युति न होने पर भाजपा की नैया डूबने की बात कहीं थी। वही पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष जमनु पुरस्वानी, प्रदीप रामचंदानी आदि युति का विरोध किया था। भाजपा के इच्छुक उम्मीदवार इस बात डरे हुए हैं कि अगर युति नहीं हुई तो उल्हासनगर में भाजपा की नैया डूबनी तय है। ‘दोपहर का सामना’ संवाददाता से भी भाजपा के स्थानीय नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि उल्हासनगर में युति नहीं होगी तो सबसे अधिक फटका भाजपा को लगेगा।

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