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विधानसभा में डॉक्टरों की आवाज उठाएंगे! …मार्ड के प्रतिनिधियों को अंबादास दानवे का आश्वासन

– डॉक्टर की आत्महत्या मामले में न्याय नहीं मिला तो सड़कों पर उतरेंगे

सामना संवाददाता / मुंबई
सातारा के फलटण में डॉक्टर की आत्महत्या के मामले ने राज्यभर के चिकित्सक समुदाय में उबाल ला दिया है। डॉक्टरों की लगातार होती मौतों पर खामोशी अब रेसिडेंट डॉक्टर्स को बर्दाश्त नहीं। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर्स ने साफ चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं मिला तो हम सड़कों पर उतरेंगे। इसी क्रम में मार्ड के प्रतिनिधियों ने शिवसेना नेता अंबादास दानवे से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस बैठक के दौरान डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त असुरक्षा और लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया। दानवे ने डॉक्टरों की सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिया कि वे विधानसभा में डॉक्टरों की आवाज बनकर सरकार से जवाब मांगेंगे और इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएंगे।
मार्ड प्रतिनिधियों ने बैठक में स्पष्ट कहा कि फलटण जैसी घटनाएं डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी को उजागर करती हैं। उन्होंने बताया कि फलटण की महिला डॉक्टर की आत्महत्या किसी व्यक्तिगत निराशा का नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते कामकाज, असुरक्षित माहौल और प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है। डॉक्टरों ने मांग की कि सरकार तुरंत उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करे, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभी सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत किया जाए। प्रतिनिधियों ने यह भी दोहराया कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्यभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
डॉक्टरों की गरिमा और सुरक्षा की है लड़ाई
बैठक के समापन पर मार्ड पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल एक डॉक्टर के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम डॉक्टरों के लिए है जो ड्यूटी पर रहते हुए मानसिक दबाव, उत्पीड़न और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो राज्यभर के अस्पतालों में कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की जाएगी।

 

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