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मोहल्ला क्लीनिक पर जड़े ताले…सैकड़ों कर्मचारियों की गई नौकरी

– पहले 31 और अब 121 मोहल्ला क्लीनिक बंद

रमेश ठाकुर / नई दिल्ली

दिल्ली सरकार के तुगलगी फरमान ने सैकड़ों कर्मचारियों को एक झटके में बेघर और बेरेजगार कर दिया। इसको लेकर कर्मचारी जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। निकाले गए सभी कर्मचारी एक साथ लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा निकाले हुए हैं। बंद की गई ‘मोहल्ला क्लीनिक’ योजना को पूर्व की केजरीवाल सरकार ने शुरू की थी। पहले 31 और अब 121 मोहल्ला क्लीनिकों पर ताला लगाने के फैसले से 650 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। आदेश के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने मामले को गंभीरता से लेकर एलजी को चिट्ठी लिखी है। कर्मचारियों को सरकार ने पिछले सप्ताह नोटिस दिया और सप्ताह बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी। सरकार के इस कदम से दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की भी आशंकाएं हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नौकरी बचाने के लिए कांग्रेस का एलजी को खत
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कर्मियों को न हटाने का अनुरोध किया है। उनकी मांग है कि कर्मचारियों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना में समायोजित किया जाए ताकि हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट न आए। देवेंद्र यादव ने बताया कि मोहल्ला क्लीनिक स्टाफ यूनियन के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। मोहल्ला क्लीनिकों में पिछले 6-7 वर्षों से हजारों डॉक्टर, फार्मासिस्ट, क्लीनिक सहायक और मल्टी टास्क वर्कर कार्यरत हैं, जिनमें से सरकार 31 क्लीनिकों पहले ही बंद कर दिया। अब 121 अन्य क्लीनिकों को भी बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे हजारों प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों को बेरोजगार होना पड़ेगा। यादव ने सरकार के कदम गैरकानूनी और अमानवीय बताया है।

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