मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
कानपुर में दिशा बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के सामने भाजपा सांसद और पूर्व सांसद में जूतमपैजार हो गया। राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति और पूर्व बसपा सांसद अनिल शुक्ल वारसी और भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले के बीच जमकर कहासुनी हुई। प्रदेश नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुये दोनों को लखनऊ तलब होने का फरमान जारी कर दिया है। बता दें कि कानपुर में माती कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जिला निगरानी एवं समन्वय समिति (दिशा) की बैठक चल रही थी।कि एकाएक भाजपा के दो गुट फिर आमने-सामने आ गए। उनके समर्थकों में हाथापाई तक की नौबत आ गई। हालांकि डीएम-एसपी ने बीच-बचाव करते हुए स्थिति संभाली। हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने इस झगड़े पर तंज कसते हुये मजा लिया है। इसके पहले भी दोनों गुटों में टकराव हुआ था। राज्य मंत्री स्वयं थाने में धरने पर बैठ गयी थीं। कानपुर देहात में भाजपा के इज्जत का फालूदा पहली बार नहीं हुआ है। देवेंद्र सिंह भोले भाजपा के मूल कैडर से हैं तो अनिल शुक्ला वारसी को अन्य दलों का भी अनुभव है।चुनाव जीतने की गरज से जरूरत पड़ने पर भाजपा में बाहरियों की जम कर भर्ती होती है, बाद में यही भर्ती मूल कैडर पर भारी पड़ने लगता है।
मंगलवार को दिशा की बैठक सांसद देवेन्द्र सिंह भोले की अध्यक्षता में शुरू हुई। यहां राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला के प्रतिनिधि के तौर पर उनके पति व पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी भी पहुंचे थे। बैठक के दौरान वारसी ने पहले भारत सरकार और राज्य सरकार के साथ ही दिशा अध्यक्ष की ओर से नामित सदस्यों की सूची मांगी। इसी बात पर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते हंगामा होने लगा। मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराते हुए बैठक दोबारा शुरू कराई। इसी बीच, अकबरपुर के मिर्जा तालाब का मुद्दा उठते ही उसकी रिपोर्ट सदन में रखे जाते ही वारसी ने इसे गलत बताया। इस पर दूसरे पक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लगने लगे तो नेताओं और उनके समर्थकों ने कुर्सी छोड़ दी। वारसी ने सांसद भोले पर फैक्ट्रियों से वसूली करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने वारसी की दिमागी हालत ठीक नहीं होने की बात कही। मामला बिगड़ता और समर्थकों में हाथापाई की नौबत आते देख डीएम कपिल सिंह और एसपी श्रद्धा पाण्डेय ने दोनों नेताओं के बीच जाकर उन्हें समझाते हुए स्थिति को नियंत्रण में किया। जोरदार हंगामे बाद के सदन स्थगित हो गया। बैठक से बाहर निकले अनिल शुक्ल वारसी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद पर गुंडों को दिशा का सदस्य बनाकर शिकायतें कराने और लोगों को टारगेट करने का आरोप लगाया।
