एड. राजीव मिश्र, मुंबई
आज दस दिन से गाँव में जवन झकोरा आवा है कि पूरी फसल के सत्यानाश होइ गवा है। एक तो खेती-बारी में अब कुछ बचा नही है, ऊपर से जब फसल तैयार भई तो दऊ कोप किये हैं। गाँव के बड़-बुजुर्गन के कहना है कि जब से घरती पर पाप बढ़ा अहइ तब से आसमान के ताप बढ़ि गवा है। संकठा के दुइ बिगहा खेत में जोन्हरी अरकट लागि रही। एक-एक बाल एक-एक हाथ के, पर तीन दिन पहिले नीलगाय के झुंड आधा खेत साफ कइ दिहस अब जवन बचा रहा उ दऊ खाई गए। खैर, हर साल की तरह यहि साल भी सरकार किसान राहत योजना के घोषणा किहिस। जेकर जेतनी फसल ओहिके उतना राहत। घोषणा होतय गाँव मे चहल-पहल बढ़ि गयी। आनन-फानन में कृषि मंत्री टीवी पे आये अउर पत्रकारन के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू किहिन, हमरा सरकार किसानन के सबसे हितैसी सरकार है। हम एक-एक किसान के साथ खड़े हैं। तब तक एक पत्रकार मंत्रीजी से पूछिस, ई आन्ही बउखा बार-बार काहें आइ रहा है, आखिर यहिका कारण का है? ई है सौ टका के सवाल, हमरी सरकार एक जाँच कमेटी बनाइस है। जे ई जाँच कइ रही है कि यहि आन्ही बउखा के कारन का है। अबही तक कउनउ मौसम संबंधी कारण नही मिला है। मंत्री जी, अगर मौसम संबंधी कउनउ कारन नही है तो ई आन्ही बउखा काहें आइ रहा है। मंत्री जी आँखन के चश्मा सही करत बोले, हमका यहि प्रलय के पाछे बिपक्षिन के हाथ लगी रहा है। कैइसे? देखो तीन दिन पहिले नीलगाय आतंक मचाइस, ओहिके बाद भगवान परलय कइ दिहेन। हमका तो ई पाकिस्तान के साजिश लगी रही है। अच्छा तो किसानन के राहत के लिए सरकार का सोचि रही है? सोचय के का है जाँच कमेटी जइसइ आपन रिपोट देई, खेत के सर्वे शुरु होइ जाई अउर सर्वे के बाद सबके खाता में ठकाठक पइसा आइ जाई। मंत्री जी सुनय में आवा है, चुनाव से पहिले आप पार्टी बदले के बारे में सोचि रहें हैं? बकलोल हो का जी? हमका तो पत्रकार कम बिपक्षिन के अदमी ज्यादा लगि रहे हो। चलो अब प्रेस कॉन्फ्रेंस खतम भई, सब लोग खाना खाओ अउर घरे जाओ कल से कागज पे सर्वे होइ, कागज पे राहत बटी और कागज पे ही किसानन के भला होई।
