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दिल्ली ब्लास्ट मामला : कानपुर के जीएसवीएम कॉलेज में पहुंची जांच एजेंसी! …निकाल रहीं डॉक्टरों की कुंडली

यूपी स्थित कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉ. शाहीन के आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद अब पूरे कॉलेज प्रशासन में हलचल मची हुई है। जांच एजेंसियां सिर्फ डॉ. शाहीन तक ही नहीं रुकी हैं, बल्कि उन डॉक्टरों की पुराने रिकॉर्ड भी निकालकर जांच कर रही हैं, जो कई साल पहले अचानक कॉलेज से गायब हो गए थे। इन डॉक्टरों को वर्ष २०२१ में शासन ने निलंबित कर दिया था, लेकिन अब उनके बारे में फिर से गहराई से जानकारी जुटाई जा रही है। प्राचार्य डॉ. संजय काला के अनुसार, कॉलेज में इस समय कुल २३० डॉक्टर कार्यरत हैं। इनमें १३० डॉक्टर रेगुलर हैं और बाकी संविदा पर काम करते हैं। डॉ. शाहीन के मामले के बाद सभी रिकॉर्ड दोबारा जांचे जा रहे हैं। किस डॉक्टर ने कब ज्वाइन किया, कब छुट्टी ली, कब गैरहाजिर रहा, सारा डेटा एटीएस और इंटेलिजेंस टीमों को दिया जा रहा है। क्यों गए थे, इतने साल कहां रहे, अब हर जानकारी मांगी जा रही है।
जिन डॉक्टरों पर अब सबसे ज्यादा जांच हो रही है, वे डॉक्टर कई साल तक कॉलेज में नहीं आए। कॉलेज ने उस समय उन्हें कई नोटिस भेजे, मगर कुछ ने जवाब नहीं दिया और कुछ की जानकारी अधूरी थी। आखिरकार शासन ने इन डॉक्टरों को २०२१ में निलंबित कर दिया था। अब जांच एजेंसियां यह पता करने में जुटी हैं कि ये डॉक्टर अचानक क्यों और वैâसे गायब हुए। इतने साल वे कहां रहे। उनकी लोकेशन और गतिविधियों में कोई संदिग्ध बात तो नहीं। गैरहाजिरी के समय उनका संपर्क किन लोगों से था। खासतौर पर उन डॉक्टरों की मूवमेंट पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिनकी गैरहाजिरी सबसे लंबी रही और जिनकी लोकेशन कॉलेज रिकॉर्ड में साफ नहीं थी। निलंबित डॉक्टरों की सूची इस प्रकार है: हिफज़ुल रहमान, डॉ. निसार, डॉ. हामिद, परवेज अहमद, विभुद प्रताप सिंह, डॉ. समता गुप्ता और श्रवण प्रताप सिंह। इन सभी की पिछले ५–७ साल की मूवमेंट, मोबाइल लोकेशन, बैंक लेनदेन और बाहर के संपर्क की जांच की जा रही है।

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