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लाडली बहनों हो जाओ सावधान! …. चुनाव आते ही फिर खुल गई ‘चूरन’ की दुकान!

सरकार ने खोली सस्ते घर, अनुदान और रेवड़ियों की पिटारी
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के चुनावों के नजदीक आते ही महायुति सरकार ने फिर से वोटर्स को लुभाने के लिए ‘लॉलीपॉप’ दिखाना शुरू कर दिया है। एक तरफ सरकार जहां नई योजनाओं की घोषणाएं कर रही हैं, वहीं पुरानी योजनाओं के लिए सहूलियतें बढ़ा दी हैं। इस तरह अनुदान की रेवड़ियां बांटने का काम महायुति सरकार ने तेजी से शुरू कर दिया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि चुनाव आते ही फिर से सरकार ने ‘चूरन’ की दुकान खोल दी है।
बता दें कि विधानसभा चुनाव में ‘लाडली बहन’ योजना से मिले भारी वोट बैंक के बाद अब सरकार ने ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समाज के लिए कर्ज का ब्याज वापस लौटाने वाली योजना लॉन्च की है। इसके अलावा शहरी इलाकों में सस्ते घर के लिए कैबिनेट ने निर्णय लिया है।
सरकार का चुनावी गणित
लाडली बहनों के केवाईसी के लिए समय-सीमा बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही फिलहाल किसी भी योजना को बंद करने की घोषणा पर रोक लगा दी गई है। सरकार की इन रेवड़ियों वाली घोषणाओं पर विपक्ष ने सवाल उठाया है कि चुनाव से पहले कई महीनों तक कोई योजना नहीं थी, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही ‘रेवड़ियों की दुकान’ क्यों खुल गई है? विरोधियों को इसमें साफ-साफ चुनावी गणित नजर आ रहा है।

मतदाताओं को लुभाने के लिए महायुति सरकार ने शुरू किया ‘कर्ज का खेल’!
चुनाव आते ही होने लगी योजनाओं की बारिश

स्थानीय निकायों के चुनाव करीब आते ही महायुति सरकार ने वोटर्स को फिर से लुभाना शुरू कर दिया है। अब उसने कर्ज का खेल शुरू किया है। इसके तहत राज्य में उच्च वर्ग के युवाओं को योजना के तहत कर्ज मिलेगा और उन्हें सिर्फ मूलधन ही लौटाना है। सफलतापूर्वक कर्ज वापस करने पर और तीन गुना कर्ज देने की योजना है और यही बात राजनीति में सवाल खड़े कर रही है। राज्य सरकार के अनुसार, इससे युवाओं को आर्थिक आधार मिलेगा, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह चुनावी फायदे का खेल है। विपक्ष का आरोप है कि ये सारी बातें अब तक सिर्फ कागज पर ही थीं। चुनाव आते ही अचानक योजनाओं की बारिश होने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ चुकी है।
सस्ते घर भी मिलेंगे
सरकार ने सस्ते घर का लॉलीपॉप भी दिया है। सरकार ने वैâबिनेट में निर्णय लिया कि २० एकड़ भूखंड पर म्हाडा घरों का निर्माण करेगी। इससे लोगों को सस्ते में घर मिल सकेगा, ऐसा दावा महायुति सरकार ने किया है। लेकिन सोचने की बात यह है कि मुंबई में म्हाडा जिस दर से घर बेच रही है, उसके लिए आम लोगों के लिए इसे अफोर्ड कर पाना बहुत मुश्किल है।
बहनों से डरी सरकार
लाडली बहनों के लिए राज्य सरकार ने केवाईसी अनिवार्य किया था, लेकिन अब तक मात्र सवा करोड़ के लगभग लाडली बहनों की केवाईसी हो पाई है। ऐसे में अब भी एक करोड़ से अधिक महिलाओं का केवाईसी बाकी है। चुनाव से पहले अगर सरकार कोई निर्णय लेती है तो उसे नुकसान हो सकता है।

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