मुख्यपृष्ठनए समाचारठाणे में भाजपा ने गणेश नाईक को दी खुली छूट ... घाती...

ठाणे में भाजपा ने गणेश नाईक को दी खुली छूट … घाती गुट में फैला भारी असंतोष!

शिकायतें लेकर शिंदे ने फिर लगाई दिल्ली दौड़
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में कल जोरदार धमाका हुआ। राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और अचानक दिल्ली के लिए उड़ान भर दी, जिसके बाद सत्ता के गलियारों में सियासी भकंप आ गया। यह दौरा पूरी तरह से अनियोजित है और इसे शिंदे की गहरी नाराजगी का संकेत माना जा रहा है।
शिंदे अपने ही गुट में बढ़ती असहमति और कमजोर होती पकड़ से परेशान हैं और इस बेचैनी का समाधान उन्हें केवल दिल्ली में ही दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने शिंदे गुट की अनदेखी कर दी है। ठाणे जो शिंदे का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, वहीं भाजपा ने अचानक अपनी ताकत बढ़ाते हुए गणेश नाईक को खुली छूट दे दी है। इसी कारण शिंदे खेमे में भारी असंतोष पसर गया है। शिंदे गुट की शिकायतें दिखाती हैं कि असफलता का कारण भाजपा नहीं, बल्कि शिंदे गुट का अव्यवस्थित ढांचा है। ठाणे में भाजपा की बढ़ती पकड़ और नेतृत्व विस्तार को लेकर शिंदे की नाराजगी समझ से परे है। क्योंकि लोकतंत्र में संगठनात्मक मजबूती ही आधार होती है। मंगलवार को राज्य की साप्ताहिक मंत्रिमंडल की बैठक में शिंदे गुट के मंत्रियों ने भाजपा पर तोड़फोड़ और दबाव की साजिश का आरोप लगाते हुए बैठक का खुला बहिष्कार किया। इसके तुरंत बाद सभी मंत्री सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कक्ष में पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, फडणवीस ने शिंदे की मौजूदगी में ही उनके मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाई, जिससे शिंदे बेहद आहत बताए जा रहे हैं।
इस अपमान के बाद कल शिंदे ने फडणवीस के साथ एक सार्वजनिक मंच साझा करने से भी साफ इनकार कर दिया। इससे यह साफ हो गया कि दोनों पक्षों में भारी तनाव है। सूत्रों का दावा है कि शिंदे दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात करेंगे। वह उनके सामने बीजेपी द्वारा पदाधिकारियों को तोड़ने के आरोप, शिंदे गुट को कमजोर करने की रणनीति, ठाणे में बीजेपी का बढ़ता वर्चस्व, मंत्रियों के अपमान का मुद्दा एक विस्तृत शिकायत-पत्र के रूप में रखने वाले हैं।
सियासी तूफान की आहट
शिंदे गुट के किसी भी मंत्री ने कल की वैâबिनेट बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि बीजेपी मित्र पक्ष के नेताओं और पदाधिकारियों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस उग्र टकराव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी बड़ा धमाका होने की आशंका जताई जा रही है।

महायुति सरकार में दरार हुई गहरी
शिंदे पिछले कुछ महीनों में कई बार दिल्ली गए हैं। अब फिर से अचानक दौरा से राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महायुति में सब कुछ ठीक नहीं है। अंदरखाने बड़ा घमासान चल रहा है। कुछ ही महीनों में कई बार दिल्ली दौरे का यह संकेत है कि शिंदे अपने निर्णयों में आत्मविश्वास खो चुके हैं। महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षणों में उन्हें लगातार केंद्र के सहारे की आवश्यकता पड़ रही है।

अन्य समाचार