सामना संवाददाता / मुंबई
स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नामांकन भरने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने अचानक नियम में बदलाव कर दिया। शिवसेना ने इसका कड़ा विरोध जताया है। शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने आयोग पर मनमानी और खुले पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया है।
मुंबई में शिवसेना भवन में आयोजित प्रेस कॉन्प्रâेंस में देसाई ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में अचानक नियम बदलकर और फर्जी नामांकन पत्र स्वीकार करके राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में हेराफेरी की है। देसाई ने बताया कि १७ नवंबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी और सभी उम्मीदवारों ने दोपहर ३ बजे की समय सीमा से पहले अपने फॉर्म जमा कर दिए थे। १८ नवंबर को अधिकारियों ने मूल परिपत्र में दिए नियमों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच शुरू की। लेकिन उसी दोपहर, राज्य चुनाव आयोग ने एक नया परिपत्र जारी कर दिया, जिसमें डमी उम्मीदवारों के लिए अनुमोदकों की संख्या एक से बढ़ाकर पांच कर दी गई। देसाई के अनुसार, यह नया नियम उसी दिन पहले से जांच पार कर चुके फॉर्मों पर भी लागू कर दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में पर्चा रद्द कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर बड़ा हमला बताया।
एबी फॉर्म की चोरी कर भरा आवेदन
शिवसेना के नाम से बिना पार्टी की मंजूरी के चार फर्जी नामांकन पत्र जमा किए गए। शिवसेना ने यह जानकारी प्रेजाइडिंग ऑफिसर, तहसीलदार, जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को लिखित रूप से दी और इन फॉर्मों को रद्द करने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने फिर भी उन्हें वैध घोषित कर दिया। देसाई ने कहा कि यह साफ-साफ धोखाधड़ी है। फॉर्म चोरी का मामला है।
