जय सिंह
सोने की तस्करी का काला नेटवर्क फिर अपने चरम पर है और इसके पीछे वही पुराना नाम डी कंपनी। दाऊद इब्राहिम का दबदबा आज भी सोने के रूट पर उतना ही मजबूत है कि एयरपोर्ट पर पकड़ा जानेवाला छोटा माल महज एक डाइवर्जन चाल साबित होता है। एजेंसियां १–२ किलो पकड़कर अपनी सफलता बताती हैं और ठीक उसी वक्त दाऊद का बड़ा पार्सल बिना खरोंच सीमा पार कर जाता है। मुंबई–दुबई रूट पर तस्करी का ये खेल ऐसे चलता है जैसे रोज की डिलिवरी हो। मुंबई एयरपोर्ट को तस्करों का ‘स्वर्ग’ कहना गलत नहीं होगा।
सरकारी फाइलों के मुताबिक-
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट:
२०२३-२०२४ में १०९१.३० किलो सोना पकड़ा गया।
२०२४–२०२५ में ६४९.५७ किलो सोना धराया गया।
फिर भी सूत्र बताते हैं कि दुबई–शारजहां-अबू धाबी रूट के गोल्ड कुरियर आज भी मुंबई में आसानी से उतर रहे हैं।
दिल्ली एयरपोर्ट पर २०२४–२०२५ के बीच २५३.४८ किलो सोना पकड़ा गया, जबकि दक्षिण भारत के त्रिवेंद्रम, कोच्ची और कालीकट गोल्ड हॉटस्पॉट बने हुए हैं।
लोकसभा रिकॉर्ड (२०१९–२०२४) में पूरे देश में कुल २७४६.४९ किलो सोना जब्त होने का आंकड़ा दर्ज है।
सोने को पिघला कर तस्करी!
डीआरआई ने मुंबई में ऐसी दो भट्टियां भी सीज कीं, जहां तस्करी का सोना पिघलाकर मार्वेâट में सप्लाई किया जाता था। ताजा मामले में मुंबई एयरपोर्ट से ४.४४ किलो सोना पकड़ा गया, जिसमें दो एयरपोर्ट स्टाफ भी शामिल पाए गए। क्लियरेंस से पहले स्वैâनर से बचाने के लिए अंदरूनी मदद दी जा रही थी। यही डी कंपनी का असली खेल है। डी कंपनी के लोग अपनी पहचान कभी ‘कंपनी’ के नाम पर नहीं बताते, हमेशा खुद को नया बताकर काम करते हैं। यही वजह है कि इनका पकड़ में आना मुश्किल होता है।
दक्षिण भारत बना ‘गोल्ड हाईवे’
साउथ रूट से आनेवाला सोना सीधा लोकल भट्टियों, कारीगरों और हवाला मार्वेâट में पहुंच जाता है।
डीआरआई लगातार ऑपरेशन चला रही है-
ऑपरेशन गोल्ड स्विप
ऑपरेशन बुलियन ब्लेज
इन्हीं के तहत हाल में-
१०.५ किलो यूएई लिंक वाला २४ वैâरेट सोना पकड़ा गया।
मुंबई में ११.८८ किलो पिघला हुआ सोना जब्त हुआ।
रूट बदला है, कारोबार नहीं
देशभर में अब तक ३००५ मामलों में ९०८ तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है,
लेकिन सजा—सिर्फ एक को।
यह आंकड़ा बताता है कि सोने की तस्करी का कारोबार रुकता नहीं, बस रास्ता बदलता है।
सोने की तस्करी के तरीके
डी कंपनी के सदस्य सोने को पिघलाकर उसे मार्वेâट में सप्लाई करते हैं।
वे एयरपोर्ट पर तैनात अपने लोगों की मदद से सोने को कस्टम की नजर से बचाकर निकाल लेते हैं।
इसके अलावा, वे हवाला मार्वेâट और लोकल भट्टियों का भी इस्तेमाल करते हैं।
डी कंपनी की तस्करी की दुनिया
डी कंपनी एक ऐसा नेटवर्क है जो तस्करी के जरिए सोना भारत में लाता है।
यह नेटवर्क दाऊद इब्राहिम द्वारा चलाया जाता है, जो एक प्रसिद्ध अपराधी है।
डी कंपनी के सदस्य तस्करी के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं और अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करते हैं।
जनमत
सगीर अंसारी
पिछले दिनों मुंबई के घाटकोपर स्थित निजी स्कूल में समोसा खाने के बाद ५ छात्रों की तबीयत बिगड़ी गई । फूड प्वॉइजनिंग के चलते सभी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि, यह पहली घटना है और न ही अंतिम, राज्य सरकार की गाइडलाइन ताक पर रख स्कूलों में खुलेआम क्या बेचा जाता है, इससे पेरेंट्स भी वाकिफ हैं और प्रशासनिक अधिकारी भी। सवाल उठता है कि बच्चों की सेहत से कब तक खिलवाड़ चलता रहेगा और प्रशासन आंख मूंदे क्यों बैठा है?
निरीक्षण जरुरी
कई स्कूलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। स्कूलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए।
आर.डी.सिंह (मीरा रोड)
मिलीभगत है
fिनयमित निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई से ही स्कूलों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। लेकिन ठेकेदारों और अन्य लोगों से प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाता।
सुधा चौरसिया (अंधेरी)
स्कूलों की लापरवाही
इसमें सबसे बड़ी लापरवाही स्कूलों की भी है। स्कूल अपने लाभ के लिए ठेकेदारों को ठेका देता है, जिसका सीधा असर फूड क्वालिटी पर पड़ता है और ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
उत्तम पांडे (अंधेरी)
