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मोदी सरकार का जनता को एक और झटका … पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट १० गुना महंगा!

रु. २,५०० की जगह देने पड़ेंगे रु.२५,०००
सामना संवाददाता / मुंबई
पुराने वाहन मालिकों को मोदी सरकार ने एक और झटका दिया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज ने पूरे देश में वाहन फिटनेस टेस्ट की फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें कुछ वाहनों के लिए पहले से १० गुना तक बढ़ गई हैं।
ये बदलाव सेंट्रल मोटर वेहिकल रूल्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) के तहत लागू किए गए हैं और ये तुरंत प्रभाव से लागू हो चुके हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि सरकार ने फिटनेस फीस की हाई वैâटेगरी के लिए गाड़ी की आयु सीमा घटा दी है। पहले १५ साल से अधिक पुरानी गाड़ियों पर ही भारी फीस लगती थी, लेकिन अब सरकार ने यह अवधि घटाकर १० साल कर दी है। यानी आपकी गाड़ी १० साल पूरी करते ही बढ़ी हुई फिटनेस फीस की वैâटेगरी में आ जाएगी। नई व्यवस्था में गाड़ियों को ३ अलग-अलग एज ग्रुप में बांटा गया है। १० से १५ साल, १५ से २० साल और २० साल से अधिक पुरानी गाड़ियां। जैसे-जैसे गाड़ी की उम्र बढ़ेगी, वैसे-वैसे फिटनेस टेस्ट का खर्च भी बढ़ेगा। पहले १५ साल से अधिक पुरानी गाड़ियों के लिए एक समान फीस लागू होती थी, लेकिन अब नियम बदल चुके हैं और हर वैâटेगरी के हिसाब से अलग-अलग फीस ली जाएगी। ये नया नियम दोपहिया, तिपहिया, क्वाड्रिसाइकिल, लाइट मोटर वेहिकल, मीडियम और हेवी गुड्स या पैसेंजर वेहिकल सहित सभी तरह के वाहनों पर लागू होगा।

भारी वाहनों पर मुसीबत
सबसे बड़ी मुसीबत भारी व्यावसायिक वाहनों पर आई है। २० साल से अधिक पुराने ट्रक और बसों की फिटनेस फीस पहले जहां २,५०० रुपए थी, अब सीधे बढ़कर २५,००० रुपए हो गई है। इसी तरह २० साल पुराने मीडियम कॉमर्शियल वाहनों की फीस १,८०० रुपए से बढ़कर २०,००० रुपए कर दी गई है।

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