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तनाव बढ़ाता है हार्ट अटैक का जोखिम! …बड़ी संख्या में बीएलओ की जान जाने पर विशेषज्ञों की राय

१२ राज्यों में चुनाव आयोग करा रहा है एसआईआर
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने आत्महत्या कर ली। उनके परिवार को घर के आंगन में उनका शव मिला। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह एसआईआर कार्य के दबाव के कारण हुआ। अब विशेषज्ञों का कहना है कि काम का दबाव ले रहा है जान। अमेरिकी मेडिकल संस्था ‘सीडीसी’ के अनुसार, जब जिम्मेदारियों की मात्रा क्षमता से कई गुना ़ज्यादा हो जाए, जैसे बीएलओ के साथ हो रहा है, तब शरीर और दिमाग दोनों पर लगातार तनाव पड़ता रहता है। लंबे समय तक यही तनाव दिल पर असर डालता है और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाता है।
समय सीमा का दबाव
डेडलाइन पूरा न कर पाने का डर, अधिकारियों द्वारा लगातार फॉलो-अप, रिपोर्ट जल्द-से-जल्द जमा करने की मानसिक थकान यह सब मिलकर दिमाग पर जबरदस्त दबाव डालता है। कई लोग इस दबाव को झेल नहीं पाते और टूट जाते हैं। जब काम इतना ज्यादा हो जाए कि परिवार, आराम, नींद और खुद के लिए समय ही न बचे, तो शरीर की रिकवरी रुक जाती है, मानसिक थकान बढ़ती है और दिल कमजोर पड़ता है।

गलती का डर और ऊपरी दबाव
जब हर गलती पर फटकार, शिकायत या सस्पेंशन का डर बना हो, तो इंसान हमेशा चिंता में रहता है। यह चिंता धीरे-धीरे मानसिक बीमारी, पैनिक, डिप्रेशन और आखिरी में सुसाइड जैसे कदम तक ले जा सकती है।
लगातार तनाव से शरीर में हार्मोनल बदलाव
लंबे तनाव में शरीर स्ट्रेस हार्मोन यानी कॉर्टिसोल अधिक मात्रा में बनाता है। इसके चलते यह दिल की धड़कन बढ़ाता है, हाइपरटेंशन पैदा करता है, ब्लड क्लॉटिंग बढ़ाता है और नींद खराब करता है। ये सभी हार्ट अटैक के बड़े कारण बनते हैं।

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