सामना संवाददाता / मुंबई
प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में महाराष्ट्र ने एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए नया इतिहास रचा है। कामा अस्पताल राज्य का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है, जिसे अधिकृत रूप से आर्ट बैंक का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ अस्पताल में उन्नत प्रजनन सुविधाएं औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी हैं, जिससे नि:संतान दंपतियों के लिए माता-पिता बनना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में पहली बार इस स्तर की अत्याधुनिक सेवाओं की शुरुआत होने से हजारों दंपतियों को नई आशा और नई दिशा मिलने की संभावना है।
कामा अस्पताल को आर्ट बैंक का लाइसेंस मिलने से यहां न केवल चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने वाला कदम भी है। आर्ट बैंक के माध्यम से अब शुक्राणु, अंडाणु और भ्रूण का वैज्ञानिक संग्रह, संरक्षित भंडारण और सुरक्षित उपयोग सरकारी निगरानी में संभव होगा। इसके साथ ही डोनर मैनेजमेंट, क्रायो-प्रिजर्वेशन और गुणवत्ता नियंत्रण जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएं भी अब अत्याधुनिक तकनीक की मदद से संचालित की जाएंगी। इन सेवाओं की उपलब्धता से उन दंपतियों को विशेष राहत मिलेगी, जो आर्थिक कारणों से निजी आईवीएफ केंद्रों का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे। कामा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पालवे ने कहा कि कामा ने महाराष्ट्र का पहला और संभवत: देश का पहला सरकारी अस्पताल होने का गौरव प्राप्त किया है, जिसे असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बैंक का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मंत्री हसन मुश्रीफ और डीन डॉ. देशमुख के मार्गदर्शन से संभव हुई है। इस आर्ट बैंक के माध्यम से शुक्राणु, अंडाणु व ओसाइट बैंकिंग, संग्रह, प्रसंस्करण और सुरक्षित भंडारण, दाताओं की भर्ती, स्क्रीनिंग और व्यवस्थापन, गैमीट्स और भ्रूण का उच्च स्तरीय प्रâीजिंग व संरक्षण, दाताओं का उपयुक्त लाभार्थियों से वैज्ञानिक तरीके से मिलान, संग्रहित सामग्री की सुरक्षा और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना, सभी प्रक्रियाओं और डोनर या रिसीपिएंट जानकारी का सटीक दस्तावेजीकरण के कामों को सटीक और आसान बनाएगा।
प्रजनन उपचारों में पारदर्शिता-भरोसेमंदी
कामा अस्पताल के प्रमुख डॉ. तुषार पालवे ने कहा कि आर्ट बैंक की स्थापना से प्रजनन उपचारों में पारदर्शिता और भरोसेमंदी भी बढ़ेगी, क्योंकि प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाएगा। इससे दाताओं और लाभार्थियों दोनों की गोपनीयता के साथ ही अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस कदम से राज्य में बांझपन उपचार की सफलता दर में सुधार होगा और अधिक से अधिक दंपतियों को संपूर्ण परिवार का सपना साकार करने का अवसर मिलेगा।
