सूफी खान
१९ जनवरी को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान अचानक नई दिल्ली पहुंचते हैं और पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख जायद अल नाहयान के बीच ३० मिनट तक बातचीत होती है। महज दो घंटे बाद भारत से संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का प्लेन वापस उड़ जाता है। आमतौर पर होता ये है कि शीर्ष नेताओं के बीच ऐसी मुलाकातें महीनों पहले तय होती हैं। लेकिन ऐसी छोटी और अचानक की गई यात्राएं किसी संकट की घड़ी में ही की जाती हैं।
मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि यूएई के राष्ट्रपति का अचानक भारत दौरा ऐसे समय में हुआ, जब यूएई को मिडिल ईस्ट में कई मोर्चों पर चोट लग चुकी है। यमन में हाल ही में सऊदी अरब के साथ हुए तनाव के बीच यूएई को बड़ी रणनीतिक हार मिली। दूसरी ओर सोमालिया ने भी यूएई के साथ एकतरफा पैâसला लेते हुए अपने सभी समझौते रद्द कर दिए हैं, इसकी वजह भी है। यूएई ने इजरायल को मान्यता देकर यमन और सोमालीलैंड में बड़े कदम बढ़ाए थे। जहां यमन में उसने सऊदी और हूती विरोधी मिलिशिया एसटीसी को सपोर्ट किया, वहीं सोमालीलैंड को मान्यता देते हुए उसका वहां एक एयरबेस बनाने का इरादा रहा है। यह कोई छोटी घटना नहीं है, बल्कि ‘हॉर्न ऑफ अप्रâीका की राजनीति को पूरी तरह बदलने वाला कदम है।
यूएई और सऊदी अरब के बीच यमन को लेकर काफी तनाव है। सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ डिफेंस डील कर चुका है। ऐसे में यूएई भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ कर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
भारत के मिडिल ईस्ट, यूरोप और यहां तक कि पश्चिम में भी लगभग सभी देशों के साथ अच्छे रिश्ते हैं। इस दौरे के पीछे यूएई की वो रणनीति हो सकती है, जिसके तहत वो भारत जैसा दोस्त चाहता है जो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ गहरे और काम के रिश्ते बनाए रखता है। मिडिल ईस्ट में यूएई के बाकी मुस्लिम देशों के साथ तनाव की स्थिति में भारत ही ऐसा देश है जो एक अच्छे मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
कहा जा रहा है कि आनन-फानन में हुई भारत यात्रा का मकसद ये भी हो सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शांति योजना के दूसरे चरण के एक मुख्य हिस्से के तौर पर गाजा के प्रशासन के लिए एक राष्ट्रीय समिति में वैश्विक नेताओं को शामिल करना चाहते हैं, इसलिए यूएई के लिए भारत जैसा भरोसेमंद और स्वतंत्र पार्टनर काफी मायने रखता है।
आरोप लगता रहा है कि यूएई ने गाजा युद्ध में पर्दे के पीछे बड़े पैमाने पर इजरायल की मदद की। इस वजह से भी वो मुस्लिम देशों के जरिए अलग-थलग कर दिया गया है। ऐसा लगता है कि खास जियोपॉलिटिकल टकराव वाले मुद्दों पर यूएई भारत का सहयोग चाहता है।
