– माघ मेला प्रशासन की नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने दी दलील
राजेश सरकार / प्रयागराज
माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान से रोकने और संतों के साथ मारपीट के विरोध में जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। शंकराचार्य लिखने पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा धरना स्थल पर मंगलवार को नोटिस चस्पा किए जाने के बाद उनके वकील ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य लिखने पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और उनके द्वारा की गई वसीयत के आधार पर वे शंकराचार्य लिख रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता ने अपनी बात रखी। इस दौरान उनके साथ स्वामी व अन्य लोग उपस्थित हैं। बता दें कि शंकराचार्य लिखने पर जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस दिया है। बता दें कि माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोकने, संतों से मारपीट के विरोध में जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं।
इसलिए लिख रहे शंकराचार्य
जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता पीएन मिश्र ने मंगलवार को माघ मेला स्थित स्वामी के शिविर के सामने धरना स्थल पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य लिखने पर रोक नहीं है। बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं। उनके गुरु ने उनके नाम रजिटर्ड वसीयत की है। इसी के आधार पर वह शंकराचार्य लिख रहे हैं।
पक्ष में हूं न विपक्ष में : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य के रूप में पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का मौन समर्थन मिलने का दावा किया था। स्वामी निश्चलानंद ने उस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, मैं इस मामले में कुछ बोलना नहीं चाहता। मैं किसी के पक्ष में हूं न विपक्ष में। अविमुक्तेश्वरानंद मेरा लाडला है, लेकिन विवाद में मुझे नहीं बोलना। उन्होंने मेला प्रशासन के निर्णय को अकाट्य बताया। साथ ही कहा कि मीडिया और दूसरे लोग विवाद को तूल दे रहे हैं, जो उचित नहीं है।
