-पहचान के सबूत मांग रही घमंडी मोदी सरकार
-कांग्रेस बोली, क्या शंकराचार्य की
-पहचान अब सरकार तय करेगी?
राजेश सरकार / प्रयागराज
देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष का आरोप है कि `कागज दिखाओ’ की राजनीति अब संतों तक पहुंच गई है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को कथित तौर पर ‘सरेंडर’ यानी नतमस्तक न करने की सजा दी गई और उन्हें शाही स्नान से रोका गया। विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार शंकराचार्य से पहचान के सबूत मांगकर आस्था का अपमान कर रही है। इस पूरे मामले को सत्ता का घमंड और दमन बताया जा रहा है। कांग्रेस ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा है,‘क्या अब शंकराचार्य की पहचान भी सरकार तय करेगी?’
माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा पर रोक के बाद उत्पन्न विवाद में एक नया मोड़ आ गया। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद उन्होंने अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ क्यों लगाया है? मेला प्राधिकरण ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि अभी तक इस संदर्भ में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है, ऐसे में कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।
बता दें कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले ४८ घंटों से बिना अन्न-जल के धरने पर बैठे हुए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनसे माफी मांगने के बजाय एक नोटिस भेजा गया है, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि सरकार उन्हें शंकराचार्य के रूप में मान्यता नहीं देती। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि यह सत्ता के घमंड की पराकाष्ठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भाजपा नेता मुसलमानों से कागजात मांगते थे और अब हिंदू समाज के संत शिरोमणि से भी पहचान के कागज मांगे जा रहे हैं। बता दें कि माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम में पालकी नुमा रथ पर सवार अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्यों रोके जाने पर विवाद गहरा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है, शंकराचार्य लिखने पर नहीं
शंकराचार्य लिखने पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा धरना स्थल पर मंगलवार को नोटिस चस्पां किए जाने के बाद उनके वकील ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य लिखने पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और उनके द्वारा की गई वसीयत के आधार पर वे शंकराचार्य लिख रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता ने अपनी बात रखी।
` सीएम योगी कोई संत नहीं’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पिछले माघ मेले में हमको साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब शृंंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि हम शंकराचार्य हैं तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं? शंकाराचार्य ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी कोई संत नहीं हैं।
