अरुण कुमार गुप्ता
केंद्रीय सड़क व राजमार्ग, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की हवाबाजी सामने आई है। गत दिनों गडकरी मुंबई-बंगलुरु हाईवे का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी टोयोटा फॉर्च्यूनर कार में बैठकर १४० किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कार दौड़ाई, वह भी बिना सीट बेल्ट पहने। ऐसे में लोगों ने उन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सत्ता में बैठकर लोगों के लिए सड़क दुर्घटना को लेकर सचेत करते हैं। ओवर स्पीडिंग से बचने की बात करते हैं। सीट बेल्ट पहनने की बात करते हैं। अब वही बिना सीट बेल्ट पहने ओवर स्पीडिंग पर उतर आए हैं। यहां यह बात गौर करने वाली है कि कानून सिर्फ आम आदमी के लिए बना है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि समय-समय पर सरकारी मुलाजिम, मंत्री या नेता सिद्ध करते रहते हैं। यहां यह बात भी गौर करने वाली है कि आम आदमी यदि सीट बेल्ट नहीं पहने तो धारा १९४ बी के तहत उस पर १,००० रु. का जुर्माना लगाते हुए चालान काटा जाता है। ओवर स्पीड के लिए १,००० से ४,००० का जुर्माना तय किया गया है। लेकिन इससे मंत्री, नेता और सरकारी मुलाजिम बाहर हैं। गडकरी की हवाबाजी से तो यही लग रहा है। मोटर वाहन अधिनियम ११२/१८३ के तहत हाईवे पर कारों के लिए १०० किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तय की गई है। वहीं भारी वाहनों के लिए ६० से ८० किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार निश्चित है, लेकिन गडकरी जी के लिए कोई नियम नहीं है। यहां यह याद रखने वाली बात है कि कुछ समय पहले गडकरी ने ही संसद में एक आंकड़ा रखा था। जिसमें उन्होंने बताया था कि सड़क दुर्घटनाओं में हर दिन लगभग ४८५ मौतें हो रही हैं और देश में औसतन हर वर्ष १.७ से १.८ लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही है, लेकिन गडकरी जी अपने बताए आंकड़ों पर गौर क्यों नहीं कर रहे हैं। इस सवाल का उत्तर हम आप पर छोड़ रहे हैं।
बोलो, लमो-लमो…!
मोदी सरकार देश के आम आदमियों की या यूं कहें कि मध्यम वर्ग के लोगों की चमड़ी उधेड़ने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रख रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो मोदी सरकार ने सिर्फ पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स से ४४ लाख करोड़ वसूली की है। इसके बावजूद देश पर करीब सवा २ लाख करोड़ तक कर्ज पहुंच गया है, जो डॉ. मनमोहन सिंह के समय मात्र ५५ लाख करोड़ था। पेट्रोलियम उत्पादों पर लूट के बाद मोदी सरकार कहती है कि हमने आयल बॉन्ड्स का कर्ज चुकाया है, जबकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार ने ४४ लाख करोड़ में से सिर्फ ३.३ लाख करोड़ ही आयल बॉन्ड्स का कर्ज चुकाया है जो कि टोटल टैक्स लूट का सिर्फ ७ प्रतिशत है, यानी हर १०० रुपए के बदले १,३०० से १,४०० रुपए सरकार ने अपनी जेब में डाले हैं। मोदी सरकार दूसरा बहाना करती है कि पूरे देश में सड़कें बनवाई है, जबकि सच्चाई यह है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने २०२५ तक ३.३ लाख करोड़ के कर्ज लिए। सच्चाई यह है कि सारी सड़कें प्राइवेट कंपनियों के उधार के पैसे से बनवाई गई हैं। टोल टैक्स वसूलने में भी मोदी सरकार ने लोगों की चमड़ी उधेड़ी है। पिछले साल महज टोल टैक्स से ७३,००० करोड़ रुपया तो वसूला गया। सारा पैसा प्राइवेट कंपनियों की जेब में गया है या उनके दोस्तों की जेब में। मोदी सरकार तीसरा बहाना यह करती है कि डायरेक्ट बेनिफिट के तहत लोगों के खाते में पैसे जमा किए हैं, जबकि सच्चाई यह है कि २०१४ के बाद से सरकार ने सब्सिडी घटाई है। टोटल सब्सिडी का हिस्सा १६ से घटाकर १३ प्रतिशत पर ला छोड़ा है। पेट्रोलियम पर सब्सिडी पांच प्रतिशत से घटाकर ०.२५ कर दिया है यानी आधे से भी कम। किसानों की खाद पर सब्सिडी ९ प्रतिशत से घटाकर ७.३३ प्रतिशत कर दी। यही नहीं डीबीटी की कोई नई स्कीम लाई ही नहीं सिर्फ डॉ. मनमोहन की स्कीमों का नाम बदलकर आगे बढ़ाया है। देश सिर्फ ब्याज के ११ लाख करोड़ रुपए हर साल चुकता है। देश में हर नागरिक पर वर्तमान में डेढ़ लाख का कर्ज है, लेकिन मोदी सरकार का इससे क्या लेना-देना, उनका सूट १० लाख का हो, जहाज ८,००० करोड़ का हो, घर ३.५००० करोड़ का हो। ऐसी स्थिति में देश के लोग बस लमो-लमो करते रहें।
खतरे की घंटी!
पश्चिम बंगाल से एक ऐसी खबर आई है, जो आम देशवासियों के लिए खतरे की घंटी है। खबर के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ९० लाख से ज्यादा वोटर काटे गए हैं। उनमें सिर्फ ६४ प्रतिशत हिंदू हैं। अब सोचिए जिस हिंदू वोट के बल पर भाजपा सत्ता में आई और हिंदुओं का मसीहा बनने की बात करती रही है, उन हिंदुओं को भाजपा डिटेंशन सेंटर में भेजने की तैयारी कर चुकी है या बांग्लादेश भेजने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। सच्चाई यह है कि बीजेपी को हिंदू नहीं चाहिए, सिर्फ उनका वोट चाहिए। जो भी इनके खिलाफ जाएगा, हिंदू हो या मुसलमान, सिख हो या इसाई, उन्हें इसी तरीके से भाजपा साफ करेगी। बंगाल के बॉर्डर जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण २४ परगना में हिंदू संकट में है। भाजपा सरकार एसआईआर लाई थी कि घुसपैठियों को निकालेंगे, बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या को बाहर निकालेंगे, लेकिन घुसपैठियों के नाम पर अब वह हिंदू कम्युनिटी मतुआ, राजवंशी जैसे हिंदुओं को बाहर निकालने पर तुली है। यहां यह याद रहे कि इन्हीं के बल पर भाजपा ने बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाया था। वरना इन्हें पश्चिम बंगाल में कौन पूछता था। यहां यह एक और सोचने वाली बात है कि यह रिपोर्ट सिर्फ बंगाल की नहीं है। आज नहीं तो कल पूरे देश में ऐसा ही होने वाला है। पीढ़ियों से हिंदुस्थान में रहने वाले लोगों को अपने आप को हिंदुस्थानी साबित करना पड़ेगा। नहीं तो भाजपा आउटसाइडर बनाने में कोई कोर कसर रखने वाली नहीं है। इन्हें अपने देश में ही बीजेपी आउटसाइडर बना देगी। असम में यह काम बीजेपी कर चुकी है। देश के अन्य राज्यों में भी ऐसा ही काम भाजपा बारी-बारी से करेगी। यह देश के लोगों के लिए एक अलार्मिंग सिचुएशन है। ऐसी स्थिति में यदि देश के लोग सचेत नहीं हुए तो नमो-नमो करते रहिए। एक न एक दिन आपको भी डिटेंशन सेंटर में जाना पड़ेगा।
