उमा सिंह
शीर्षक पढ़कर आपको भी लगा ना `४४० वोल्ट का झटका। लेकिन ये उत्तर प्रदेश है जनाब, यहां ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। जैसे यहां दाएं पैर में दर्द हो तो बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया जाता है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो तो आंखों की रोशनी ही छीन ली जाती है। ऐसे में अगर किसी बच्चे या बच्ची ने ३री की परीक्षा दी है और उसके हाथ में सीधे ५वीं पास का रिजल्ट आ जाए तो इसमें ज्यादा हैरानी की कोई बात ही नहीं है, याद रहे ये यूपी है ना…इट्स हैपन ओनली इन यूपी…!
चलो अब आपको जल्दी से माजरा भी बता देते हैं कि आखिर ये कहां हुआ, वैâसे हुआ..? दरअसल, मामला उत्तर प्रदेश के संभल जिले से शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पर एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में कक्षा ३ की मासूम छात्रा को जबरन सीधे कक्षा ५ का रिजल्ट थमा दिया गया। इस घटना से न सिर्फ बच्ची बल्कि उसके परिजन भी हैरान और परेशान हैं। परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी अभी उस स्तर की पढ़ाई के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में यह कदम उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इतना ही नहीं, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि टीचर ने रिजल्ट देने के नाम पर १२० रुपए की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम से नाराज परिजनों ने शिक्षा विभाग से शिकायत कर बेटी को सही कक्षा (कक्षा ३) का रिजल्ट दिलाने की गुहार लगाई है। मामले के सामने आने के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य और संबंधित शिक्षक कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था का `चमत्कारी’ मॉडल देख हर कोई हैरान है। यूपी के `मिशन कायाकल्प’ की चौतरफा चर्चा हो रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा सरकार में शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल फर्जी हो गई, जहां कक्षा ३री के छात्रा को ५वीं की जबरन डिग्री दी जा रही है। सोशल मीडिया पर अब लोग सीएम योगी से पूछ रहे हैं कि सीएम साहब, क्या यही है आपका `मिशन कायाकल्प’? जहां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है। एक मां अपनी बेटी के भविष्य के लिए चिंतित है कि बिना कक्षा ४ और ५ पढ़े वह आगे वैâसे बढ़ेगी, लेकिन विभाग को सिर्फ कागजी आंकड़े पूरे करने से मतलब है। भाजपा सरकार ने शिक्षा को मजाक बना दिया है, जहां न पढ़ाई की चिंता है, न सिलेबस की, बस `एडजस्टमेंट’ का खेल चल रहा है।
