सूफी खान
ईरान अमेरिका जंग में खुद को मध्यस्थ दिखा रहे पाकिस्तान को एक राहत मिल गई है। दरअसल हमेश उधारी पर मौज काटने की रणनीति अपनाने वाला पाकिस्तान का एक बड़ा कर्जा उतारने के लिए सऊदी तैयार हो गया है। ये वो कर्जा जो यूएई की तरफ से पाकिस्तान पर चढ़ा था और ये छोटी मोटी नहीं बल्कि अच्छी-खासी रकम थी। जी हां, पाकिस्तान पर यूएई का करीब ३.५ बिलियन डॉलर का उधार था। ऐसे में इजरायल के पक्के दोस्त यूएई को पाकिस्तान की कवायद पसंद नहीं आ रही थी, उसने अपना पुराना उधार मांग लिया। अब पाकिस्तान के पास तो पैसे होते नहीं हैं, वो तो सिर्फ उधारी की जिंदगी जीने वाला मुल्क है, ऐसे में सऊदी ने पाकिस्तान को ३ बिलियन डॉलर दिए हैं कि वो यूएई को लौटा दे, लेकिन इसकी एवज में अपनी पुरानी डिफेंस डील के तहत पाकिस्तान को अपने फौजें सऊदी अरब भेजनी पड़ी हैं। पाकिस्तान के करीब १३ हजार फौजी सऊदी भेजे गए हैं। सऊदी ने अपने पड़ोसी यूएई पर प्रेशर बनाने के लिए ही ये फौजी बुलवाए हैं। दरअसल, यूएई खुलकर इजरायल के पक्ष में फील्डिंग कर रहा है। यही वजह है कि ईरान ने यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और कारोबारी सेंटर्स पर खूब मिसाइलें दागी थीं। सऊदी और यूएई भले ही पड़ोसी हैं, लेकिन यमन में तेल कब्जाने को लेकर दोनों में काफी खींचतान रही है। इतना ही नहीं, सऊदी अरब को ईरान का खतरा तो बना ही हुआ है। ४० दिनों की जंग में ईरान ने सऊदी के अमेरिकी ठिकानों पर बहुत हमले किए हैं और अमेरिका अपने ठिकानों की हिफाजत कर नहीं पाया। एक्सपर्ट कहते हैं कि खित्ते के अमीर मुल्क सऊदी अरब को समझ में आ गया है कि उसे अपना ध्यान खुद रखना पड़ेगा। अमेरिका पर निर्भरता छोड़ना पड़ेगा। यही वजह है कि पाकिस्तान के साथ उसकी डील अब काम आ रही है। जिसके तहत एक पर हमला दूसरे पर माना जाएगा। ये अलग बात है कि ईरान के बेतहाशा हमलों के बीच पाकिस्तान सऊदी के लिए कुछ नहीं कर पाया था। अब ईरान अमेरिका के बीच मध्यस्थता करके पाकिस्तान अपना कद बढ़ाने की फिराक में है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ आनन-फानन में तीन मुस्लिम मुल्कों को दौरे पर भी निकल गए हैं। वो १५ से १८ अप्रैल तक सऊदी, कतर और तुर्की का दौरा करेंगे। हालांकि पाकिस्तान इन तीनों मुल्कों के मुकाबले इकोनॉमिकली बहुत ही वीक है, लेकिन इस्लामिक देशों में एकमात्र न्यूक्लियर ताकत होने के कारण उसकी पूछ थोड़ी बढ़ जाती है।
