योगेश कुमार सोनी / नई दिल्ली
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने जिलों के डीसीपी को अपनी टीम खुद चुनने के लिए नया क़ानून बनाया है और अपनी टीम चुनने की आज़ादी दी है। इसके तहत वो अब इंस्पेक्टर लेवल से लेकर सिपाही तक की तैनाती जिले की किसी भी यूनिट में कर सकते हैं। इससे पहले जिलों के डीसीपी सिर्फ कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक को इधर से उधर कर सकते थे।पुलिस आला अधिकारियों का कहना है कि ऐसा नियम बनाने का उद्देश्य यह है कि जिले की कप्तानी करते हुए डीसीपी को खुलकर काम करने का मिले जिससे की वो कानून-व्यवस्था और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम समेत अन्य मामलों को बेहतर तरीके से डील करने के लिए अपने भरोसेमंद स्टाफ को नियुक्त कर सकें।
पुलिस कमिश्नर ने बाकायदा इसके लिए एक स्टैंडिंग ऑर्डर भी जारी किया है जिसमें जिले के डीसीपी, डीसीपी-1 और डीसीपी-2 की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।स्पष्ट किया गया है कि डिस्ट्रिक्ट का ओवरऑल इंचार्ज डीसीपी होगा जिसे रोजाना के कामकाज में दोनों एडिशनल डीसीपी सहयोग करेंगे।
इसी ऑर्डर में कहा गया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी ट्रांसफर-पोस्टिंग की पॉलिसी के लिए जिला लेवल पर बनने वाली पुलिस एस्टेब्लिशमेंट बोर्ड का चेयरमैन डीसीपी होगा, जिसके बाकी दो मेंबर एडिशनल डीसीपी होंगे।
इस बोर्ड को सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को जिले में कहीं भी तैनात करने की पावर होगी।पअब पुलिस के आला अफसर कहते हैं कि डीसीपी को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अगर उसे डिस्ट्रिक्ट की कमान सौंपी गई है तो फिर काम करने का पूरा मौका और छूट देना जरूरी है, ताकि उसकी जवाबदेही और जिम्मेदारी भी फिक्स हो। इसे स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत जिलों के स्पेशल स्टाफ, स्पेशल टास्क फोर्स, एटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड, एंटी नारकोटिक्स सेल जैसे ऑपरेशंस यूनिट्स, डिस्ट्रिक्ट इन्वेस्टिगेशन यूनिट, महिला सेल और पब्लिक ग्रीवांस सेल में डीसीपी अपने भरोसे के अफसरों को नियुक्त कर सकेंगे।
